0
नई दिल्ली, 2 अगस्त, 2016 : लोक सभा अध्यक्ष, श्रीमती सुमित्रा महाजन के निदेशानुसार आज अध्यक्षीय शोध कदम के तत्वावधान में संसद सदस्यों के लिए सतत विकास लक्ष्य विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई । इस कार्यशाला के वक्ताओं में नीति आयोग, विकासशील देशों के लिए शोध और सूचना प्रणाली(आर आई एस), एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट (टी ई आर आई ) और विदेश मंत्रालय के विशेषज्ञ शामिल थे ।

सदस्यों को सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों से सतत विकास लक्ष्यों तक की परिवर्तन प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई । उन्हें यह भी बताया गया कि सतत विकास लक्ष्यों में 17 महत्वाकांक्षी लक्ष्य और इनसे जुड़े 169 टारगेट हैं और इनका उद्देश्य विकास प्रक्रिया को पारिस्थितिकी सरोकारों के साथ जोड़ना और सतत विकास के तीन प्रमुख पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक आयामों में संतुलन लाना है । यह महसूस किया गया कि सतत विकास लक्ष्य सभी जगह लागू किये जाने की जरूरत है और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा । इसके अलावा यह उल्लेख किया  गया कि नीतिगत ढाँचे में समुचित कार्यान्वयन और जवाबदेही के तंत्र शामिल होने   चाहिए  ।

सदस्यों को इस तथ्य से अवगत कराया गया कि सतत विकास लक्ष्यों का उद्देश्य यह समझना है कि गरीबी दूर करने, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे लोगों के हितों को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दे किस प्रकार अन्य कारकों से प्रभावित होते हैं । ये लक्ष्य खाद्य, जलवायु परिवर्तन और जल सुरक्षा के बारे में वैश्विक समुदाय को प्रभावित करने वाले कारकों से भी जुड़े हुए हैं । सदस्यों को सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत टारगेट प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों और अनेक पहलों के बारे में भी जानकारी दी गई ।

सबका यह विचार था कि सतत विकास के लिए यह आवश्यक है कि सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत लक्ष्यों में राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को अवश्य शामिल किया  जाए  ।

Post a Comment Blogger Disqus

 
Top