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दिल्ली 09-जुलाई 2016: प्रबंधन के साथ बैंक कर्मचारियों के प्रतिनिधियों की वार्ता शुक्रवार को विफल होने के बाद बैंककर्मियों ने अगले मंगलवार और बुधवार यानी 12,13 जुलाई को हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। यह जानकारी यूनियन नेता सी.एच. वेंकटचलम ने दी। एक बयान में अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव वेंकटचलम ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ उसके सहयोगी बैंकों के विलय और आईडीबीआई के निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों को प्रबंधन ने कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया। केंद्र सरकार के मुख्य श्रम आयुक्त ने अपने कार्यालय में शुक्रवार को वार्ता आयोजित की थी। वार्ता में वित्त सेवा विभाग के अधिकारियों, भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के प्रतिनिधियों, एसबीआई के पांच सहयोगी बैंकों के प्रतिनिधियों और संघ के नेताओं ने भाग लिया। वेंकटचलम ने कहा कि इच्छित और जानबूझकर बकाएदारों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की जगह सरकार लोगों का ध्यान भटकाने के लिए बैंकों के निजीकरण और एकीकरण जैसे कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि संघों ने एसबीआई के साथ उसके पांच सहयोगी बैंकों के प्रस्तावित विलय, आईडीबीआई के प्रस्तावित निजीकरण और इस तरह के अन्य कदमों को अवांछित बताया। वेंकटचलम के मुताबिक, संघ के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुके बुरे ऋणों की वसूली बैंकों की असली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि एसबीआई के सहयोगी बैंकों के प्रबंधन ने कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया। केवल बयान जारी कर यह कहा कि वे संघ से बात करने को हमेशा इच्छुक हैं। सरकार ने एसबीआई के साथ उसके पांच सहयोगी बैंकों -स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद- के साथ ही भारतीय महिला बैंक के विलय को मंजूरी दे दी है। एआईबीईए ने प्रस्तावित विलय के विरोध में एसबीआई के पांच सहयोगी बैंकों के 45,000 कर्मचारियों से 12 जुलाई को हड़ताल करने का आह्वान किया है। एआईबीईए ने अगले दिन 13 जुलाई को सभी बैंकों के कर्मचारियों की हड़ताल की योजना के समर्थन की भी घोषणा की है।

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