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नई दिल्ली। रियल इस्टेट कानून का डर या फिर महंगा होमलोन लेकिन देश में प्रॉपर्टी के नए प्रोजेक्ट लॉन्च होना कम होते जा रहे हैं। खास बात ये है कि इसका सबसे ज्यादा असर दिल्ली-एनसीआर में ही पड़ा है जिसे रियल इस्टेट प्रोजेक्ट का हब कहा जाता है। एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है। रिपोर्ट में इस हालत की वजह भी बताई गई है। दरअसल देशभर में बिना बिके मकानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बिल्डर नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने से पहले अपने मौजूदा स्टॉक को बेचना चाहते हैं। वे इसके लिए आकर्षक आफर भी दे रहे हैं। इसके चलते दिल्ली-एनसीआर में ही प्रॉपर्टी की कीमतों में 4 फीसदी की गिरावट हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक बिल्डर की लेटलतीफी के चलते अब खरीदार भी रेडी टू मूव फ्लैट खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ये रिपोर्ट प्रॉपर्टी रिसर्च फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया ने तैयार की है। उसके मुताबिक नए प्रॉपर्टी लॉन्च की संख्या में अप्रत्याशित कमी देखने को मिली है। पिछले साल की तुलना में इस साल नए लॉन्च 9 फीसदी घट गए हैं। जबकि 2013 की तुलना में तो ये आधे रह गए हैं।

नाइट फ्रैंक की इस रिपोर्ट में देश के 8 बड़े शहरों का जिक्र है। इसके मुताबिक दिल्ली एनसीआर में नए लॉन्च पिछले साल के मुकाबले 41 फीसदी तक घट गए हैं। वहीं चेन्नई में 36 और पुणे में 32 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। खास बात ये है कि मुंबई इस मामले में पूरी तरह से अपवाद है। जहां घटने की बात छोड़िए पिछले एक साल में नए लॉन्च 29 फीसदी तक बढ़े हैं।

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