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दिल्ली 12 July 2016: 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अपनी तैयारी में लगातार लगी हुई है। प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री के इस्तीफा देने के बाद प्रियंका गांधी ने प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद से उनके घर मुलाकात की। हालांकि बैठक खत्म होने के बाद प्रियंका ने मीडिया से बात नहीं की लेकिन इस बात की संभावना जताई जा रही है कि यूपी चुनावों के लिए जल्द ही उन्हें पार्टी का स्टार प्रचारक होने की घोषणा कर दी जाएगी। शुरूआती रिपोर्टों की मानें तो कांग्रेस ने तय किया है कि प्रियंका को यूपी चुनावों के लिए पार्टी का स्टार कैंपेनर बनाया जाएगा लेकिन पार्टी ने अब तक इस मसले पर चुप्पी साध रखी है क्योंकि अभी हाईकमान से फिलहाल कोई पुष्टि नहीं हुई है। वहीं गुलाम नबी आजाद पहले ही प्रियंका की तरफदारी कर चुके हैं। बता दें कि प्रियंका अभी कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अमेठी तक ही सीमित हैं। टीवी रिपोर्ट्स के अनुसार यूपी चुनावों को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी सोमवार ( 11 जुलाई ) को आजाद से मिल चुके हैं। वहीं यूपी में कांग्रेस की दशा दिशा सुदृढ़ करने के लिए प्रशांत किशोर ने कथित तौर पर यह सुझाया है कि अगर राहुल गांधी प्रदेश में पार्टी का चेहरा बनने से इंकार करते हैं तो प्रियंका को उनकी जगह लाया जाएगा। गौरतलब है कि बीते 26 सालों से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हालत बहुत अच्छी नहीं रही है।
 उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कि पटकथा तभी से लिखी जा रही है, जब से प्रशांत किशोर को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का मैनेजर बनाया गया. करीब तीन महीने पहले से इस तरह की खबरें आने लगी थीं कि प्रशांत किशोर ने फॉर्मूला दिया है कि प्रियंका गांधी कांग्रेस का प्रचार करें और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर पेश किया जाए. उस समय ये बातें हवाई लगती थीं, लेकिन 4 जुलाई को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नए प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने 10 जनपथ पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ लंबी मुलाकात की. मुलाकात का सिलसिला अगले दिन भी चला. इसके बाद आजाद ने कहा, 'हम सब चाहते हैं कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रचार करें. हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला खुद उन्हीं को करना है. यह खबर गलत है कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश चुनाव अभियान कमेटी की प्रमुख बना दी गई हैं. दरअसल, यह कांग्रेस की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. कांग्रेस सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रशांत किशोर की भूमिका उससे कहीं बड़ी होने जा रही है, जितनी वह अभी नजर आती है. प्रशांत के फॉर्मूले के तहत ही आजाद को भरोसेमंद मुस्लिम चेहरे के तौर पर यूपी भेजा गया है. पार्टी के दूसरे मुस्लिम चेहरे सलमान खुर्शीद कुछ दिन पहले अचानक ट्विटर प्लेटफॉर्म पर उतरे और बीजेपी के खिलाफ धुआंधार मोर्चा खोल दिया. इसके अलावा जल्द ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निर्मल खत्री को कोई और जिम्मेदारी दी जाएगी. फैजाबाद से सांसद रहे खत्री आचार्य नरेंद्र देव के नाती हैं और गांधी परिवार के बेहद करीबी हैं, लेकिन प्रशांत के जातिगत फॉर्मूले में वे फिट नहीं बैठ रहे हैं. कांग्रेस की रणनीति ब्राह्मण और मुस्लिम, दोनों को अपनी ओर खींचने की है. वैसे, प्रियंका के प्रचार मैदान में उतरने की संभावना से खत्री उत्साहित हैं, 'प्रियंका प्रदेश में चुनाव प्रचार करेंगी तो जनता और कार्यकर्ता, दोनों में नया जोश आएगा. वहीँ माना जा रहा है कि शीला दीक्षित को यूपी भेजने की बात पक्की कर ली गई है. खुद दीक्षित ने कहा, ''पहले मैं इस बात को लेकर पसोपेश में थी कि समय बहुत कम बचा है. लेकिन पार्टी जो भी आदेश देगी, उसका पालन करूंगी. '' लेकिन कांग्रेस जल्दबाजी में नहीं है. प्रियंका को मंच पर लाने से पहले कांग्रेस जमीन की मजबूती ठोक-बजाकर देख लेना चाहती है. वाराणसी से पूर्व सांसद राजेश मिश्र से मीडिया से बात करते हुए बताया कि 'कांग्रेस कभी काडर बेस पार्टी नहीं रही है, कांग्रेस मास बेस पार्टी है. पार्टी लंबे समय से सत्ता में नहीं है, इसलिए हमारे बहुत से नेता इधर-उधर चले गए. सपा, बीएसपी और बीजेपी में आखिर हमारे पुराने नेताओं के परिवार ही तो हैं. प्रियंका सामने आएंगी तो जनता कांग्रेस के पीछे आएगी और आप देखेंगे कि बहुत से लोग पार्टी में लौटेंगे. असल बात यह है कि कांग्रेस का माहौल बनेगा.' मिश्र उस तरह के नेता हैं जो प्रदेश अध्यक्ष के लिए प्रशांत किशोर की ओर से गढ़े गए फॉर्मूले में जाति और ऊर्जा, दोनों की दृष्टि से समा सकते हैं. पार्टी मानकर चल रही है कि प्रियंका के आने का सबसे ज्यादा असर शहरी मतदाता पर दिखेगा. संयोग से इन सीटों पर पारंपरिक रूप से बीजेपी का दबदबा रहा है. यानी इन सीटों पर पारंपरिक वोट के साथ ही प्रियंका के आने से आया उत्साह और ब्राह्मण-मुस्लिम समीकरण मिलकर कांग्रेस की किस्मत बदल सकते हैं.


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