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नई दिल्ली13 July 2016: कपिल सिबल ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान की रक्षा करने वाले सुप्रीम कोर्ट को हम सेल्यूट करते हैं। मैं समझता हूं कि हिंदुस्तान के इतिहास में ये दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार ये फैसला किया है कि अगर कोई भी राजनीतिक दल
संविधान की मर्यादा का उल्लंघन करेगा तो हम अपने फैसले से ये तय करेंगे कि जिस सरकार, संवैधानिक सरकार, चुनी हुई सरकार को बर्खास्त किया है, उसी सरकार को हम वापस ले आएंगे, ये पहले के इतिहास में आज तक नहीं हुआ। ये एक बहुत बड़ी बात है और आज सिद्ध हो गया है कि हमारे न्यायपालिका ही संविधान की सुरक्षा कर सकती है।
दूसरी बात जो चेतावनी आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्यपालों को दी गई कि अगर किसी दल से आप जुड़े हुए हैं, जिस दल ने आपको राज्यपाल का औहदा दिया गया है अगर आप उसकी मदद करोगे, संविधान का दुरुपयोग करके तो उस फैसले को भी हम रद्द करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दो निर्णय, जो मैं समझता हूं अपने आप में ऐतिहासिक हैं वो ये हैं कि कोई भी राज्यपाल ये आदेश नहीं दे सकता कि किसी सैशन को प्री-पोंन किया जाए, आपको याद है कि ये सैशन जनवरी में तय किया गया था कि होगा और उसको राज्यपाल ने दिसंबर में प्री-पोंन कर दिया, इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया और कहा ये धारा 174, धारा 163 का उल्लंघन है। साथ साथ में आपको ये भी याद होगा कि राज्यपाल ने ये संदेश भी एसेम्बली को दिया कि किस तरीके से हाउस चलेगा, कौन सा रेज्यूल्यूशन पहले पास करने के लिए रखा जाएगा, उसकी कैसे वीडियोग्राफी होगी, मतलब कि हाऊस की प्रोसिडिंग में दखलअंदाजी करना, इस निर्णय को भी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया है और कहा है कि ये धारा 175 और धारा 163 का उल्लंघन है, तो ये एक चेतावनी जाती है और उत्तराखंड में बीजेपी सरकार ने बड़ा प्रय़ास किया राज्यपाल से रिपोर्ट मांगने का कि आप जल्द से जल्द रिपोर्ट भेजो कि संविधान का उल्लंघन हुआ है, इस बात में तो सफल नहीं हुए, राज्यपाल अड़े रहे। लेकिन राजखोआ जी दूसरे किस्म की तबीयत के राज्यपाल हैं और सुना है आजकल छुट्टी पर हैं, तो परमानेंट छुट्टी पर चलें जाएं तो बेहतर होगा।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जो मतलब है वो ये है कि 15 दिसंबर को जो भी स्थिति थी वो आज रहेगी। मतलब के 15 दिसंबर का सूरज, सूरज रहेगा और निश्चित रुप से नबम तुकी जो सरकार का काम संभाले हुए थे, वो मुख्यमंत्री रहेंगे और उसके बाद जैसे भी हाऊस चलेगा उसका फैसला तो हाऊस ही करेगा।
हम सबसे पहले ये मांग करते हैं कि गवर्नर को बर्खास्त किया जाए। दूसरी हम मांग करते हैं कि जो भी केंद्र के मंत्री इस निर्णय में शामिल थे वो अपनी सफाई दें और माफी भी मांगे और तीसरी मांग हम ये करते हैं जिसकी अभी तक जांच नहीं हुई कि इस बीच जब इन्होंने प्रयास किया कि सरकार को गिराना है तो एक बिजनेस मैन के साथ बातचीत हुई जो टेप-रिकोडिड बातचीत हमने कोर्ट में भी पेश की और बिजनेस मैन ने कहा कि मुझे पैसों की जरुरत है, क्योंकि जो हमारे बीजेपी के पक्ष में आएंगे या सरकार को तोडेंगे उनको भी पैसों की जरूरत होगी, बिना पैसो के तो काम होते नहीं हैं तो आप पैसों का इंतजाम करो, बिजनेस मैन को बोल रहे हैं वो और इसमें जो निर्णय हुआ है कि किस तरह से ये करना है इसमें प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी की भी सहमती है, हम ये मांग करेंगे कि इस "टेप-रिकोडिडबातचीत की जांच होनी चाहिए, कौन बिजनेस मैन थे, कौन इनकी पार्टी के लोग थे और जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा, क्योंकि आपको मालूम है कि उत्तराखंड में जैसा ही स्टींग हुआ था, तो इन्होंने तुरंत जांच बैठा दी और तुरंत CFSL को भेज दी, यहाँ कोई ऐसी बात नहीं हुई, आज तक वो ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था, तो ये मांग हम संसद में करेंगे और इनको जवाब देना होगा, प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी को जवाब देना होगा और किन-किन लोगों ने ये असंवैधानिक सलाह दी, उनको भी जवाब देना होगा।
एक और बात आपके सामने रखना चाहता हूं वो ये है कि इनका लक्ष्य है कांग्रेस मुक्त भारत और जो भी हमारी गिनी-चुनी सरकारें हैं उनको ये गिराने में लगे हैं और इनका मकसद ये है कि कुछ लोगों को ये अपने पक्ष में कर लेते हैं, अपने पक्ष में करके फिर राज्यपाल के पास जाकर कहते हैं कि वो सरकार अल्पमत हो गई है और उसके बाद ये राष्ट्रपति शासन लागू करते हैं और इनको मालूम है कि राष्ट्रपति शासन तो पास हो नहीं सकता, क्य़ोंकि राज्यसभा में इनका बहुमत नहीं है फिर इसको ये वापस लेते हैं और इस बीच सरकार में बदलाव कर लेते हैं। यही बात इन्होंने उत्तराखंड में की और यही बात इन्होंने अरुणाचल में की। ये षडयंत्र चला नहीं क्योंकि संविधान की रक्षा करने वाली न्यायपालिका है। यही बात अब ये नोर्थ ईस्ट के प्रदेशों में करने जा रहे हैं और अब इस चेतावनी के बाद इनको थोडी बहुत तो समझ आई होगी कि ऐसे करने में ये विफल रहेंगे और कानून की रक्षा करने वाले कानून की रक्षा करेंगे। 



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