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नई दिल्ली4/7/2016। ढाका हमले में जान गंवाने वाली भारतीय तारिषी जैन के दोस्त फराज ने वह काम कर दिखाया जिसने आतंक के मुंह पर जोरदार तमाचा जड़ा है। तारिषी आतंकी हमले के दौरान रेस्टोरेंट में अपने दो दोस्तों अंबिता कबीर और फराज हुसैन के साथ मौजूद थी। आतंकियों ने फराज को बांग्लादेशी होने की वजह से जाने को कहा था, लेकिन उसने तारिषी का साथ नहीं छोड़ा। 6 आतंकियों ने इन तीनों समेत 20 विदेशियों को धारदार हथियारों से मार डाला था।
तारिषी, अंबिता और फराज अमेरिकन स्कूल में साथ-साथ पढ़े थे और तीनों की मौत भी साथ ही हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकियों ने फराज से रेस्टोरेंट से जाने को कहा था लेकिन वह अपने दोस्तों को अकेला छोड़कर जाने को तैयार नहीं था। आतंकी चुन चुनकर लोगों को मार रहे थे और वो कुरान की आयतें पढ़ने को कह रहे थे, जिन्हें आयतें आती थीं उन्हें बख्शा जा रहा था और जिन्हें आयतें नही आती थीं उन्हें गला रेतकर मारा जा रहा था।
फराज को आती थीं कुरान की आयतें, पर तारिषी की खातिर दे दी जान! ढाका हमले में जान गंवाने वाली भारतीय तारिषी जैन के दोस्त फराज ने वह काम कर दिखाया जिसने आतंक के मुंह पर जोरदार तमाचा जड़ा है...
तारिषी के दोस्त फराज को भी आयतें आती थीं। वो चाहता तो अपनी जान बचा सकता था लेकिन 20 साल के फराज ने अपनी दोस्त तारिषी और अंबिता के लिए खुद की जिंदगी दांव पर लगा दी। आतंकियों ने भारत की तारिषी और अमेरिका की रहने वाली अंबिता कबीर को मौत के घाट उतार दिया और फिर फराज को भी मार डाला।
ढाका में आतंकी हमले के दौरान मारी गई तारिषी जैन ने अपने परिवार को फोन किया था। उसने कैफे के बाथरूम में खुद को छुपाया और वहां से अपने पापा को फोन किया था। उसने कहा, 'आतंकी रेस्‍टोरेंट में घुस गए हैं। मुझे डर लगा रहा है पता नहीं कि मैं जिंदा बाहर आ पाऊंगी या नहीं। वे सब लोगों को मार रहे हैं।' इसके बाद फोन कट गया।

उसके पापा संजीव जैन ने बताया कि तारिषी गर्मियों की छुट्टी में घर आई हुई थी। संजीव जैन 20 साल पहले कारोबार के लिए बांग्‍लादेश चले गए थे, वहां उनका गारमेंट का बिजनेस है। 19 साल की तारिषी कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी में इकॉनॉमिक्‍स में ग्रेजुएशन कर रही थी।

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