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नई दिल्ली। इरफान खान की  'कुबार्नी संबंधी बयान पर मौलवियों के आसमान सिर पर उठा लिया है और उन्हें सलाह दी है कि उन्हें अपनी एक्टिंग पर ध्यान देना चाहिए। जयपुर के उलेमा और मौलवियों ने कहा कि इरफान एक्टर हैं और एक्टिंग ही करें, पब्लिसिटी के चक्कर में न पड़ें। शहर काजी शेर काजी खालीद उस्मानी ने कहा है कि इरफान को इस्लाम का ज्ञान नहीं है इसलिए चुप रहे हैं तो बेहतर है। मौलवियों ने जब ज्यादा हायतौबा मचाया तो इरफान ने पलटकर जवाब दिया कि गनीमत है कि वह ऐसे देश में रह रहे हैं जहां ऐसी चीजों के लिए किसी के पास ठेकेदारी नहीं है। इरफान ने कहा था कि कुर्बानी का मतलब अपनी कोई अजीज चीज कुर्बान करना होता है, ये नहीं कि बाजार से आप कोई दो बकरे खरीद लाए और उनको कुर्बान कर दिया। आपको उन बकरों से कोई लेना-देना नहीं है तो वो कुबार्नी कहां से हुई? इससे कौन-सी दुआ कुबूल होती है? हर आदमी अपने दिल से पूछे कि किसी और की जान लेने से उसको कैसे पुण्य मिल जाएगा।' इरफान ने यह भी कहा कि हमारे जो भी त्यौहार हैं, उनका मतलब हमें वापस से समझना चाहिए कि वो किसलिए बनाए गए हैं, मेरा सौभाग्य है कि मैं ऐसे देश में रह रहा हूं जहां हर धर्म का सम्मान होता है। इरफान ने मंत्रियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह मदारी डमरू बजाकर वादा करता था कि सांप और नेवले की लड़ाई दिखाएगा लेकिन  कभी दिखाता नहीं, ऐसे ही वादे मंत्री करते हैं, पर पूरा नहीं कर पाते। फिल्म 'मदारी' 15 जुलाई को रिलीज होनी है। वहीं इरफान के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है।
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