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दिल्ली 12 July 2016: कोयला घोटाला मामले में पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमएल शर्मा कमेटी की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मंगलवार को बताया कि शुरुआती जांच में समिति ने सिन्हा को कोयला घोटाला मामले को प्रभावित करने का दोषी पाया है. सुप्रीम कोर्ट में रोहतगी ने बताया कि कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, रंजीत सिन्हा के घर की विजिटर डायरी में मौजूद एंट्री सही लग रही हैं. कमेटी का मानना है कि रजिस्टर में मौजूद एंट्रीज से यह जाहिर होता है कि रंजीत सिन्हा कुछ आरोपियों से मिले थे. कोर्ट ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने और आगे की कार्रवाई पर आदेश सुरक्षित रख लिया. अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में केंद्र सरकार का भी पक्ष रखा. उन्होंने ने कहा कि अगर इन मुलाकातों को सही मान भी लिया जाए तो इसका घोटाले की जांच पर गलत असर पड़ा, ये साबित नहीं होता है. रजिस्टर असली है या नहीं, इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है क्योंकि इसको लेकर कोई जांच नहीं हुई है. रोहतगी ने आगे कहा कि इस मामले में कमेटी के जुटाए सबूत नाकाफी हैं और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने लायक नहीं हैं. इसके अलावा रंजीत सिन्हा ने जो भी फैसले लिए वो मुख्य सतर्कता आयोग की निगरानी में लिए गए. अटॉर्नी जनरल ने यह भी कहा की सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी, अगर ये रिपोर्ट सभी पक्षों को दी जाए.
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता कॉमन कॉज के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से कहा, 'जब प्रथम दृष्टया यह लग रहा है कि रंजीत सिन्हा ने जांच प्रभावित करने की कोशिश की है तो फौरन रंजीत सिन्हा के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए. डायरी सही है और जो मुलाकातें हुईं उससे सिन्हा के फैसले प्रभावित हुए, इसलिए इस मामले की विस्तार से एसआईटी जांच होनी चाहिए.' भूषण ने आगे कहा कि यह जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है कि क्या रिश्वत का लेन-देन हुआ है? क्या सिन्हा की संपत्ति आय से अधिक है? कोई भी जरिया नहीं है जिससे रिपोर्ट की सत्यता परखी जा सके.  रंजीत सिन्हा की तरफ से पेश हो रहे वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि सीबीआई में जो भी फैसला लिया जाता है वो दस्तावेजों पर आधारित होता है. इस पर सीवीसी की निगरानी रहती है, इसलिए कुछ गलत करने का कोई सवाल ही नहीं है.


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