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 * जय प्रकाश पाण्डेय

अमेरिका अपने को विश्व सभ्यता का अगुआ बताता है, पर वहां रंगभेद और वैचारिक भेद के चलते जिस तरह की मारकाट होती है, उससे कोई भी सभ्य समाज शरमा जाए. अमेरिका की हथियार संस्कृति और आर्म्स लॉबी वहां के कानून और राष्ट्रपति तक पर भारी है.

अमेरिका में जुलाई के पहले हफ्ते में पुलिस द्वारा काले लोगों पर की गई घातक गोलीबारी के विरोध में हो सात जुलाई को हो रहे प्रदर्शन के दौरान स्निपर्स ने 'घात लगाकर हमला'किया, जिसमें पांच पुलिस अधिकारी मारे गए और सात अन्य घायल हो गए.

अमेरिकी इतिहास में यह पुलिस के लिए सबसे भयंकर दिनों में से एक था. गोलीबारी शहर के पुराने इलाके के व्यस्ततम हिस्सों में से एक में हुई. यह इलाका होटलों और रेस्तरांओं से भरा है.

घटना से आहत अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, जो नाटो सम्मेलन में शिरकत करने के लिए वारसॉ गए हुए थे ने कहा कि इस सप्ताह लुइसियाना और मिनेसोटा में पुलिस द्वारा काले लोगों पर की गई घातक गोलीबारी नस्ली भेदभाव का सिंबल' है और सभी अमेरिकियों को इन क्रूर हरकतों से दुखी होना चाहिए. क्योंकि ये कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं. ये हमारे आपराधिक न्याय तंत्र में व्याप्त व्यापक नस्ली भेदभाव का संकेत हैं.'

ओबामा ने उन आंकडों का हवाला दिया, जो दिखाते थे कि काले लोगों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने और गोली मारने की संभावना ज्यादा है. ओबामा ने कहा कि काले लोगों की तुलना में अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों को रोके जाने की संभावना 30 प्रतिशत ज्यादा है. 'रोके जाने के बाद अफ्रीकी-अमेरिकियों और हिस्पैनिक लोगों की तलाशी लिए जाने की संभावना तीन गुना ज्यादा है.'

अभी कुछ समय पहले ही, अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित एक गे नाइट क्‍लब पर एक हमलावर की अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई थी और 53 से ज्‍यादा लोग घायल हो गए थे. राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे आतंक और नफरत भरी घटना करार दिया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा था, 'हम ओरलैंडो के लोगों के साथ हैं. हालांकि यह कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी, लेकिन यह आतंक और नफरत भरी घटना है. हालांकि ऐसी कोई भी घटना हमें बदल नहीं सकती. यह सिर्फ एक नाइट क्लब नहीं था. लोग यहां आते थे, एकजुटता दिखाने के लिए. वो डांस करते थे, गाना गाते थे, जीने के लिए आते थे. आज का दिन हमारे समलैंगिक साथि‍यों के लिए दिल तोड़ने वाला है. यह हमारी अखंडता पर मौलिक हमला है.'

हमलावर मतीन की पहचान अमेरिकी नागरिक के तौर पर हुई थी, जो पोर्ट सेंट लुइस इलाके का रहने वाला था. उसके पिता ने बताया कि उमर मतीन यह मानता था कि समलैंगिकता एक समस्या है और इसको खत्म करने की जरूरत है. अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेट पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि वह अमेरिका में सबसे भीषण गोलीकांड से बेहद दुखी हैं. जबकि रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने घटना को 'संभावित आतंकवाद' करार दिया.

इससे पहले अमेरिका के ही ओरेगन राज्य में 20 साल के एक बंदूकधारी ने एक सामुदायिक कॉलेज पर गोलीबारी कर कम से कम 10 लोगों को मार डाला और 20 अन्य को घायल कर दिया था. बाद में पुलिस ने हमलावर को मार गिराया. अमेरिका में इस एक साल में सामूहिक हिंसा की यह 45 वीं घटना थी. डगलस काउंटी के शेरिफ जॉन हैनलिन का कहना था कि, ‘यह एक भयावह दिन है. निश्चित तौर पर यह हमारे समुदाय के लिए एक बड़ा दुख है.'

तब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जो बंदूक नियंत्रण कानूनों की लंबे समय से वकालत करते रहे हैं, ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा था कि इसके लिए हमारी प्रार्थनाएं और संवदेनाएं पर्याप्त नहीं हैं.गुस्से और दुख में दिख रहे ओबामा ने यह भी कहा कि 'यह कहना उचित होगा कि जो लोग इस तरह का काम करते हैं, उनके दिमाग में कोई न कोई बीमारी है. चाहे वे कुछ भी सोचकर ऐसी घटनाओं को अंजाम क्यों न देते हों.' उन्होंने आगे कहा, ‘धरती पर केवल हम ही ऐसा देश नहीं हैं, जहां मानसिक बीमारी से ग्रसित लोग हैं या जहां लोग दूसरों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. लेकिन हम धरती पर एकमात्र ऐसा देश हैं, जहां कुछ ही महीनों के अंतराल पर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, और इन मामलों में अमेरिका आगे रहता है.'

हथियार समर्थक लॉबी से कड़ा मुकाबला कर रहे ओबामा ने तब यह भी कहा था कि 'अमेरिका में लगभग हर पुरुष, महिला और बच्चे के लिए बंदूक मौजूद है. इसलिए आप सीधे-सीधे यह कैसे कह सकते हैं कि अधिक बंदूकें हमें सुरक्षित बनाएंगी? हम जानते हैं कि जिन देशों में हथियारों से संबंधित कड़े कानून हैं, वहां इस तरह की घटनाएं कम देखने को मिलती हैं.'


ओबामा की बातें सच हैं, पर इस समाज को रहनुमाई देने की जिम्मेदारी किसकी है. यह नफरत हमें कहां ले जाएगी कहना मुश्किल. सो सभ्य समाजों को खुद ही बेहतरी का रास्ता ढूंढना होगा.  

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