0
02 Jul 2016 /उत्‍तराखण्‍ड - मूसलाधार बारिश और अतिवृष्टि से जिले में 43 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त होने से 80 से अधिक गांवों में जल संकट हो गया है। लोग दो किमी दूर प्राकृतिक स्रोतों से वाहनों की मदद से अपने और मवेशियों के लिए पानी जुटा रहे हैं। 20 मई से शुरू हुए बारिश और अतिवृष्टि से जहां ऊखीमठ नगर, ऊखीमठ-फाफंज, ऊखीमठ-मंगोलचारी पेयजल योजनाएं कई स्थानों पर टूटी हैं।
वहीं सेमला और भींगी की पेयजल योजनाएं पूर्णरूप से ध्वस्त हो गई हैं। यहां ग्रामीण बरसाती गदेरे का पानी पीने को मजबूर हैं। इधर, जखोली ब्लाक के मवाण गांव, चाका, जैली, कंडाली तथा अगस्त्यमुनि ब्लाक में मदोला, भुनका, कोठगी आदि पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हैं।

यहां ग्रामीण दूरस्थ स्रोतों से पानी जुटा रहे हैं। जनपद में 30 विभागीय और 13 ग्राम पंचायतों की योजनाओं को क्षति पहुंची हैं। मवाणागांव के ग्राम प्रधान रेखा देवी का कहना है कि पेयजल योजना 15 दिन से टूटी है।

ग्रामीण गदेरे का गंदीला पानी पी रहे हैं, जिससे बीमारी का खतरा बना हुआ है। सेमला के वन पंचायत सरपंच देवेंद्र सिंह और केएन त्रिवेदी ने बताया कि 28 परिवार 800 सौ मीटर दूर से पानी जुटा रहे हैं। स्टोर टैंक ध्वस्त होने से स्थिति गंभीर हो गई है।

बारिश और अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त 43 योजनाओं को क्षति पहुंची है। सड़क से लगे गांवों में टैंकर से पेयजल सप्लाई की जा रही है। टूटी योजनाओं की स्थायी मरम्मत के लिए शासन को 1, 27, 70 हजार का इस्टीमेट भेजा जा चुका है।
वही दूसरी ओर चमोली जनपद में तीन स्थानों पर बादल फटने के बाद लापता हुए नौ लोगों में से पांच के शव बरामद कर लिए गए हैं। जबकि अब भी छह लोग लापता हैं। घाट कस्बे के पुराने बाजार में एक मकान में सो रहे दादा और पोता नंदाकिनी नदी में बह गए। दशोली ब्लाक के सिरों गांव में अखोड़ी गदेरे के उफान में बहे दो युवकों के शव मिले हैं। जबकि इसी ब्लाक के जाखणी गांव में दो नेपाली मजदूरों सहित पांच लोग लापता हैं।
बृहस्पतिवार रात नौ बजे से हो रही बारिश शुक्रवार को भी जारी रही। बारिश से बदरीनाथ हाईवे के जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से करीब तीन हजार यात्रियों को जगह-जगह सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया गया है। दशोली ब्लाक के सिरौं गांव के बीचों-बीच स्थित अखोड़ी गदेरे में सुबह पांच बजे बादल फटने से गदेरा उफान पर आ गया। इससे गांव के मनोहर सिंह झिंक्वाण (30) पुत्र मोहन सिंह और जयप्रकाश (36) पुत्र दर्शन सिंह बह गए। पुलिस ने दोनों का शव बरामद कर लिया है।

घाट पुराने बाजार में नंदाकिनी के ऊफान से घूनी गांव निवासी रामचंद्र (80) और उनका पोता योगेश्वर प्रसाद (18) पुत्र सुंदरमणि आवासीय मकान समेत बह गए हैं। दोनों के शव बरामद हो गए हैं। घाट ब्लॉक के जाखणी गांव में भी चार लोगों के बहने की सूचना है। यहां राजेश्वरी देवी पत्नी बीरबल, अव्वल दास और दो नेपाली मूल के मजदूर मलबे में जिंदा दफन हो गए हैं।

इसी ब्लाक के वादुक गांव में ग्रामीण जीत सिंह आवासीय भवन के क्षतिग्रस्त होने से मलबे में दब गया है। घाट पुराने बाजार में शंभू प्रसाद, बदरी प्रसाद, कुंवर राम और हिम्मत सिंह के मकान भी नंदाकिनी नदी में बह गए हैं। कुमजुग गांव के कुमारतोली तोक में नंदाकिनी नदी से करीब 12 मकान मलबे में दब गए हैं।

गांव में स्थित सरस्वती विद्या मंदिर का भवन भी मलबे में दब गया है। गांव के ग्रामीण बुद्धिराम, गुड्डूराम, मंजू, संदीप, महावीर, नंदी देवी, सीता देवी और वंशीराम को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने सुरक्षित निकाल दिया है।

घाट बाजार में सुरेंद्र सिंह, अब्दुल गफ्फार और गीता देवी की दुकानें बह गई हैं, जबकि ग्रामीण शिव सिंह नेगी, मोहन सिंह, नरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, भागवत सिंह और रमेश रौतेला के आवासीय मकान नदी के कटाव से खतरे की जद में आ गए हैं।

इनके मिले शव
मनोहर सिंह झिंक्वाण (30) पुत्र मोहन सिंह, ग्राम-सिरौं, चमोली
जयप्रकाश (36) पुत्र दर्शन सिंह, ग्राम -सिरौं, चमोली
जीत सिंह (30) पुत्र खिलाप सिंह, ग्राम-वादुक, घाट, चमोली
लापता लोग-
अव्वल दास पुत्र सेमी दास, ग्राम-जाखणी, चमोली
राजेश्वरी देवी पत्नी बीरबल सिंह, ग्राम-जाखणी, चमोली
रामचंद्र, ग्राम-घूनी, घाट
योगेश्वर प्रसाद (18) पुत्र सुंदरमणि, ग्राम घूनी, चमोली

दो नेपाली मूल के मजदूर
भारी बारिश से सहमे तमिलनाडू के तीर्थयात्री
गोपेश्वर। चमोली बाजार से करीब आधा किमी पहले रुईगाड में बादल फटने से बदरीनाथ हाईवे करीब सौ मीटर बह गया है। यहां स्थित होटल में ठहरे 60 तीर्थयात्रियों और 13 स्थानीय लोगों को पुलिस और लोगों की मदद से सुरक्षित निकाल दिया गया है। बदरीनाथ हाईवे नंदप्रयाग, चमोली, बिरही और कोड़िया में अवरुद्ध हो गया है।
रुईगाड के समीप एक होटल में ठहरे तमिलनाडू के 34 तीर्थयात्री भारी बारिश को देखते हुए सहमे हुए हैं।

तीर्थयात्री कृष्णन, चंद्रशेखर, सिलवरनाथ, कमलानाथ, अय्यपन और मुक्त विजयन का कहना है कि वे बृहस्पतिवार को बदरीनाथ धाम जा रहे थे। रात्रि विश्राम के लिए चमोली बाजार में ठहर गए। कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने पहली बार ऐसी प्रलयंकारी बारिश देखी।

होटल के समीप गदेरे में डरावनी आवाजें आ रही थी। बाहर देखा गदेरा उफान पर था। गदेरे में मलबा और बोल्डर बह कर आ रहे थे। इसी दौरान चमोली बाजार की ओर से कुछ पुलिस वाले और स्थानीय लोगों ने हमें वहां से सुरक्षित निकाला।

         

बारिश उत्तराखंड पर कहर बन कर टूटी
अतिरिक्त सचिव, सी रविशंकर ने पीटीआई भाषा को बताया कि बड़े इलाके पर बादल फटने के बाद पहाड़ों से टनों मलबा नीचे आ कर गिरा और यह पता लगाना मुश्किल है कि लापता लोग कहां फंसे हैं।बारिश उत्तराखंड पर कहर बन कर टूटी और पिथौरागढ़ और चमोली जिलों में बादल फटने की श्रृंखला में कई घर चपेट में आ गए जिसमें 12 लोग मारे गए और 17 अन्य मलबे में फंस गए। फंसे लोगों के बचने की उम्मीद कम है।
बृहस्पतिवार की अर्द्धरात्रि और शुक्रवार सुबह आसमानी आफत ने दर्जनों लोगों और उनके घरों को जमींदोज कर डाला। लोगों के नाते, रिश्तेदार आपदा की भेंट चढ़ गए। यह लोग कई दशकों से आपदा की मार झेल रहे हैं। प्रकृति ने एक दिन पहले खतरे का अहसास करा दिया था। रामगंगा और गोरी नदी उफान पर थी, पेड़, बोल्डर, मलबा अपने साथ बहाकर चल रही थी, लेकिन नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने को गंभीरता से नहीं लिया गया। कोई अलर्ट तक जारी नहीं किया गया।
कुमाऊं में अभी सिर्फ दो दिनों से तेज बरसात शुरू हुई है और नतीजे भयावह हैं। नैनीताल हो या अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ या चंपावत सबमें कुल मिलाकर शनिवार को 26 सड़कें पहाड़यिों से भारी मात्रा में मलबा-बोल्डर आने से बंद हो गई हैं। हालांकि लोनिवि अधिकारियों का दावा है कि इनमें से कुछ सड़कें वह शनिवार देर शाम तक यातायात के लिए खोल देंगे। लेकिन, लगातार हो रही बारिश के कारण ऐसा कर पाना मुश्किल लग रहा है।
वर्ष 2013 का जलप्रलय कोई भूला नहीं है। उस बार भी आपदा की आहट का संकेत हमारी नदियों ने दिया था। नामिक से निकलने वाली रामगंगा उस साल जून के पहले सप्ताह में पेड़, बोल्डरों को अपने साथ बहाकर ला रही थी। हजारों मरी मछलियां नदी तट पर बिखरी थी। कुछ दिन बाद 16, 17 जून 2013 के जलप्रलय का मंजर सबने देखा।

यही संकेत इस बार भी प्रकृति ने दे दिया था। रामगंगा कई दिनों से उफान पर थी। मिलम से निकलने वाली गोरी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया था। नदी तट की जमीन पानी से पट गई। 30 जून को गोरी नदी की विकरालता को देख किसी अनहोनी की आशंका पैदा हो गई थी। यह आशंका एक जून को बस्तड़ी, नाचनी के नौलड़ा समेत तमाम स्थानों में दिखी, लेकिन अफसोस आपदा प्रबंधन विभाग ने न तो नदियों का संकेत समझा, न ही लोगों को इसके खतरे से अवगत करा पाया।

वास्तविक ड्रिल में कहीं नहीं टिकता तंत्र
बरसात का सीजन आने से पहले इस जिले में भारी रकम खर्च कर भूकंप, आपदा का मॉकड्रिल करने का रिवाज सा बना लिया गया है, लेकिन बात जब वास्तविक ड्रिल की आती है तो ये तंत्र बेहद बेबस और लाचार नजर आता है। बस्तड़ी के मामले में भी यही हुआ। सड़क, संचार व्यवस्था पुख्ता होती तो कई की जिंदगी बच सकती थी। बस्तड़ी हादसे के प्रत्यक्षदर्शी कृष्णानंद भट्ट बताते हैं कि गांव का होनहार युवा रवींद्र भट्ट (38) मलबे में दबा था। गांव के लोगों ने उसे निकाला, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। क्योंकि समय पर मदद नहीं मिली। शुक्रवार सुबह 6.30 बजे हादसा हुआ। 9.30 बजे सबसे पहले सेना पहुंची। बस्तड़ी गांव में अपने मित्र के यहां आए नारायणनगर निवासी अर्जुन कन्याल ने सरकारी तंत्र की लापरवाही पर सवाल खड़े करते हुए बताया कि जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी का मोबाइल फोन घटना के दिन सुबह 8 बजे तक स्विच आफ था। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी और जिला प्रशासन दोपहर 3 बजे बाद गांव में पहुंचा। वही डीएम पिथौरागढ डीएम सविन बंसल कहते है कि जिले में आपदा प्रबंधन टीम मुस्तैद है।

आपदा पिथौरागढ़ में और एनडीआरएफ अल्मोड़ा में
पिथौरागढ़ जिला आपदा की दृष्टि से प्रदेश में अति संवेदनशील स्थानों पर शुमार है। हर साल बरसात की आपदा यहां कई जिंदगियों को लीलती है, लेकिन हमारी सरकार और उसका तंत्र कितने संवेदनशील है, इसका नजारा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) की टीम पिथौरागढ़ जिला में रखने के स्थान पर 100 किमी दूर अल्मोड़ा में रखी गई थी। बस्तड़ी के हादसे के बाद टीम अल्मोड़ा से रवाना हुई। शुक्रवार देर शाम एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर पहुंची। हाल में मुख्यमंत्री की वीडियो कांफ्रेंसिंग में एक आला अधिकारी ने एनडीआरएफ की टीम को अल्मोड़ा के स्थान पर डीडीहाट में रखने की बात उठाई थी, लेकिन इसको हल्के में लिया गया।
नैनीताल जिले में बंद पड़ी सड़कें
सड़क का नाम सड़क खुलने की संभावित तिथि
-रूसी बाइपास 5 जुलाई
-भुजान-बेतालघाट 3 जुलाई
-र्गिजया-रामनगर-बेतालघाट 4 जुलाई
-देवीपुरा-सौड़ 3 जुलाई
-अमेल खोला-कैंची हरतपा 5 जुलाई
-बानना मोटर मार्ग 5 जुलाई
-भोर्सा-पिनरो 6 जुलाई
-बजून-अघोड़ा 5 जुलाई
-हरतपा-हली 5 जुलाई
-छीड़ाखान-अमजड़ 3 जुलाई
-देवली महतौली 3 जुलाई
-बबियाड़-दुधली 3 जुलाई
बागेश्वर में बंद पड़ी हैं ये सड़कें कब तक खुलेंगी
-नामची-चित्ताबगड़- 5 जुलाई
धरमगढ़-बस्ती- 5 जुलाई
-सौंग-खलीधार 10 जुलाई
(कपकोट-सामा समेत दो अन्य सड़कें यातायात के लिए खोल दी गई हैं।)
अल्मोड़ा में बंद पड़ी सड़कें सड़क खुलने की संभावित तिथि
-सोमेश्वर बिन्ता-द्वाराहाट सड़क 7 जुलाई
-सोमेश्वर-कौसानी सड़क खुल गई
-रानीखेत-मोहान सड़क खुल गई
-खैरना-रानीखेत सड़क खुल गई
-अल्मोड़ा-ताकुला सड़क खुल गई
पिथौरागढ़ में मृतकों की संख्या में 12 हो चुकी है। प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए डीडीहाट के लोगों ने ओगला में आपदा के दौरान मारे गए लोगों के शव रखकर प्रदर्शन किया। इधर आपदा मंत्री दिनेश अग्रवाल ने शनिवार को बस्तड़ी पहुंचकर आपदा से हुए नुकसान और राहत कार्यो का जायजा लिया। चम्पावत में चल्थी के पास भारी मलबा आने से टनकपुर-तवाघाट मार्ग 11 घंटे से बंद है।
शुक्रवार रात हुई मूसलाधार बारिश से सोमेश्वर में भी भारी नुकसान हुआ है। ज्योलीकोट-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग कैंची से सुयालबाड़ी में जगह-जगह मलबा आने से बंद है। सोमेश्वर क्षेत्र में 9 पुल बह गए है। रानीखेत-बिंता हाईवे बंद होने के कारण रानीखेत पहुंचने के लिए लोगों को 50 किमी अतिरक्ति सफर करना पड़ रहा है। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है।

         

2013 में उत्तराखंड में आपदा का कहर ; सरकार अधिकतर वादों को भूल गई.
मौसम केंद्र द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में, नैनीताल, उधमसिंहनगर, चंपावत, अल्मोडा, पौडी, हरिद्वार, देहरादून और टिहरी जिलों में कल सुबह से 72 घंटों के दौरान कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश तथा अन्य पांच जिलों में छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पिथौरागढ़ में 26 लोगों की मौत के अलावा 4 लोग गंभीर रूप से घायल चमोली जिले में भूस्खलन में 9 लोगों के मरने की खबर है नई टिहरी परेशानियां बढ़ गई देहरादून जिले में सॉन्ग नदी और हरिद्वार में गंगा उफान पर हैं. सड़के पानी में डूब गई हैं. उत्तराखंड में हो रही बारिश और तबाही को देखते हुए बचाव दल की कोई खास तैयारी दिखाई नहीं देती है.
साल 2013 में उत्तराखंड में आपदा का कहर बरपा था. आपदा के बाद भविष्य की सुरक्षा के लिए तमाम दावे किए गए थे लेकिन सरकार अधिकतर वादों को भूल गई.
2013 की आपदा ने चमोली जिले के 84 गावों में कहर ढाया था. तब 84 गावों में से अधिकतम गांवों का विस्थापन करने की बात चली थी. लेकिन तीन साल में बात सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाई. सर्वे भी महज 17 गांवों का ही हो सका है.
उत्तराखंड में बादल फटने की घटना के बाद मलबे में दबे 14 शवों को बाहर निकाला गया है. पुलिस ने शनिवार को कहा कि पिथौरागढ़ और चमोली जिलों के छह गांवों में शुक्रवार को बादल फटने से 39 लोगों की मौत हो गई.
इस घटना से अधिकतम क्षति बासतेड़ गांव में हुई है, जहां 30 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है. क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद बादल फटने से 60 से अधिक घर नष्ट हो गए हैं। गांवों में 200 मवेशियों की मौत हो गई है.
अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ दो घंटे में 100 मिलीमीटर बारिश हुई है, जिससे अधिकांश नदियों में बाढ़ आ गई है. आपदा प्रबंधन दल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खराब मौसम की वजह से बचाव कार्य बाधित हुए हैं.
राज्य आपदा बचाव बल, अर्धसैनिक बल और सेना बचाव दल की कई टीम आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फंसी हुई हैं. संचार के सभी साधन नष्ट हो गए हैं.
उत्‍तराखण्‍ड 16 वर्ष में अपना कोई तंत्र ही विकसित नही कर पाया, उत्‍तराखण्‍ड हर छोटे व बडे कार्य के लिए केन्‍द्र पर निर्भर रहता है, यह बात अलग है कि भारी भरकम बजट हर वर्ष व्‍यय होता है, परन्‍तु हर वर्ष बरसात में जान व माल का नुकसान होता है, राज्‍य सरकार का तंत्र छाता पकड कर खडा जरूर हो जाता है, वही उत्‍तराखण्‍ड में बरसात हो, जंगलों में आग लगे, कुछ भी हो, केन्‍द्र सरकार मौके पर जाना छोडकर केन्‍द्र से मदद मांगने दिल्‍ली भागती नजर आती है-
केंद्र तत्काल हरकत में आया और प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ की अतिरिक्त कंपनियां भेजी गयीं तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों को हालात पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया.किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ के चार दलों को तैयार रखा गया है. केंद्र सरकार राज्य के साथ लगातार संपर्क में है
भट्ट ने कहा, ‘इससे पहले केंद्र में भाजपा नीत सरकार ने तब राज्य सरकार को मदद का हाथ बढ़ाया था जब इस साल राज्य में जंगलों में लगी आग ने संकट की स्थिति पैदा कर दी थी.भाजपा के केंद्रीय नेताओं के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ कांग्रेस की प्रदेश इकाई की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीतिक शिष्टाचार नहीं भूलना चाहिए.् हमारे संवाददता प्रमोद उनियाल ने बताया है कि गढ़वाल के कईं जिलों में संपर्क मार्ग क्षति ग्रस्त हो गए हैं. ग्राम पंचायत भीरी के बगर तोक में बारिश के चलते जहां निर्माणाधीन भवन और पुश्ते बह गए हैं. आवासिय भवनों के किनारे भूस्खलन के चलते भवन मलबे में दब गए हैं. हर तरफ बस तबाही का मंजर देखने के मिल रहा है.
नई टिहरी,जाखणीधार,घनसाली और लंबगांव में बारिश शुरू हो गई.बारिश के चलते नई टिहरी जिला मुख्यालय में लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं. कई कालोनियों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है. नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही से अकसर बरसात के समय नालियां चोक होने से बारिश का पानी सड़कों पर बहता है और आवासीय बस्तियों में जलभराव की समस्या बढ़ जाती है..लेकिन नगर पालिका द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है.
बारिश को देखते हुए डीएम इंदुधर बौड़ाई ने सोमवार तक सभी स्कूल कॉलेजों को बंद करने के निर्देश दिए और आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर अधिकारियों को एलर्ट पर रहने के निर्देश दिए डीएम इंदुधर बौड़ाई ने लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम को एलर्ट पर रहने के निर्देश दिए
पिथौरागढ़ में 26 लोगों की मौत के अलावा 4 लोग गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं. जिन्होंने इस भूस्खलन में अपनों को खोया है, वे सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं. एक पिता ने आत्महत्या कर ली क्योंकि उसका बेटा भूस्खलन में आए मलबे में दबकर काल के गाल में समा गया है.
बारिश और भूस्खलन ने जिस तरह पिथौरागढ़ और चमोली में मौत का तांड़व किया है, उससे 2013 की आपदा का मंजर एक बार फिर लोगों के जहन में ताजा हो गया है. उत्तराखंड पर अगले 48 घंटे भारी गुजरने वाले हैं. मौसम विभाग की माने तो इस दौरान भारी से भारी बारिश होने का अलर्ट दिया है. अभी तक अकेले पिथौरागढ़ में ही 26 लोगों की मौत होने की सूचना है. जबकि चमोली में भी 9 लोगों की जान चली गई है. पिथौरागढ का बस्तड़ी गांव पूरी तरह जमींदोज हो गया है. उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन का का दौर जारी है.

चमोली जिले में भूस्खलन में 9 लोगों के मरने की खबर है. यहां प्रशासन ने 6 लोगों के मरने की पुष्टि की है. तीन लोगों का अभी तक कुछ अतापता नहीं है. लोग भारी बारिश को देखते हुए बेहद डरे हुए हैं.
ऊधर्मंसह नगर जिले में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। खटीमा में खकरा नाले के ओवरफ्लो होने से सबसे अधिक दिक्कतें हुईं। सितारगंज और जसपुर में नदियों से भू-कटाव हो रहा है। रुद्रपुर के साथ ही अन्य कस्बों में जलभराव से भी लोगों को दिक्कत हो रही है। बारिश के चलते कई शहरों में बिजली गुल होने से लोग परेशान रहे।
खटीमा में ओवर फ्लो हुए खकरा नाले का पानी मयूर विहार, राजीव नगर से लेकर मेलाघाट रोड तक कई कालोनियों में घुस गया। अमाऊं, गोसीकुआं, बरी अंजनिया, बंगाली कालोनी, खलड़िया, कंजाबाग हाईडिल कालोनी और सीमांत क्षेत्र मेलाघाट, खलड़िया व नगरातराई में 50 से अधिक घरों में बरसाती पानी घुस गया है। यहां दिन भर बाढ़ जैसे हालात रहे। प्रशासन की टीम, विधायक और नेताओं ने खटीमा विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर लोगों को बरसाती पानी की निकासी का आश्वासन दिया।
सितारगंज में नालों की सफाई नहीं होने से बरसात का पानी घुसने से राधास्वामी सत्संग भवन के पास करीब 10 एकड़ में लगाई गई धान की पौध खराब हो गई। कैलाश नदी में 30 हजार क्यूसेक और बैगुल नदी में 20 हजार क्यूसेक तक पानी आया। नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद खेतों का कटाव तेज हो गया है।

         

हरीश रावत के मंत्री भी सवालों के घेरे मे
देहरादून: एक बार फिर सूबे का आपदा प्रबंधन कठघरे में है। सवालों की ताबड़तोड़ बरसात हो रही है? अकसर, इन सवालों को जिंदगियों की टूटने और आशियानों के जमींदोज होने का इंतजार होता है। जब कहीं आसमान से आफत टूटती है और कोहराम मचाती है तो ये सवाल तन कर खड़े हो जाते हैं। इनके निशाने पर लाजिमीतौर पर सरकार ही होती है। गुरुवार को भारी बारिश में हुये जानमाल के भारी नुकसान के बाद का यही नजारा है। सबसे बड़ा सवाल, जब मौसम विभाग ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया था, तो सरकार ने बचाव एवं राहत कार्यों के प्रभावी उपाय पहले से क्यों नहीं किये? सूबे में चाहे जिस दल की सरकार हो, जवाब सबका एक ही है और एक ही होता कि प्रकृति पर किसका जोर है? मौजूदा सरकार का प्रश्न है तो यह बड़ा ही विचित्र है कि हाई अलर्ट होने के बावजूद सरकार ने उसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जितना लिया जाना चाहिए था। ये आरोप इसलिये लगाया जा रहा है कि दूध का जला भी छांछ फूंक-फूंक कर पीता है। 2013 की आपदा के बाद इसी सरकार में बड़ी-बड़ी बातों हुईं। लाखों रुपये सेमिनारों और गोष्ठियों और शोध पत्रों में फूंके गए ताकि इनमें उन उपायों को खोज सकें, जिनसे जिंदगियों को आपदा के कहर से बचाया जा सके। सरकारों से सूबे की प्रजा य उम्मीद तो कर ही सकती है कि वह उसे सुरक्षित और भयमुक्त जीवन का भरोसा दिलाये। मगर पहाड़ों में बसी आबादी का प्रबंधन सिर्फ और सिर्फ भगवान भरोसे है। जहां तक सूबे की सरकार का सवाल है तो उसे पॉलिटिक्स के प्रबंधन से ही फुरसत नहीं है। जब आसमान से आफत टूट रही होती है तो मुख्यमंत्री हरीश रावत दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के दरबार में हाजिरी लगा रहे होते हैं। उन्हें सूबे की प्रजा के बीच ये संदेश देना है कि वे दिल्ली के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं, लेकिन वहां उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कुर्सी बचाने के लिये उन्हें कानून के जानकारों से मशविरा करना है कि वह विधान सभा में विनियोग विधेयक लाएं कि नहीं।
हैरानी तो मंत्रिमंडल को देखकर भी होती है। आपदा की घड़ी में प्रजा के साथ खड़े होने का ठेका सिर्फ मुख्यमंत्री का ही नहीं है। मंत्रियों की भी कुछ जिम्मेदारी है। मगर राज्य में सरकारी से लेकर सियासी मोर्चे पर मुख्यमंत्री ही नजर आते हैं। आखिर आपदा सरीखी घटनाओं में भी मंत्रियों की उदासीनता क्या जाहिर करती है? संगठन के हाल तो सरकार से भी बुरे हैं। सिर्फ कांग्रेस के ही नहीं भाजपा के भी।
उनकी संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि वे आपदा सरीखे मुद्दे पर भी सियासत कर रहे हैं। एक-दूसरे की कमियां गिना रहे हैं। बयानबाजी से जुदा किसी भी पार्टी का अब तक कोई भी राहत दल आपदा प्रभावित इलाकों के लिये कूच नहीं कर पाया है। लेकिन उन्हें एक-दूसरे की लाइन काटने से फुरसत मिले तो वे प्रजा के बारे में सोचे। आखिर बयानबाजियों में राहत और प्रबंधन कब तक होता रहेगा?
   उत्‍तराखण्‍ड आपदा- राहत एवं बचाव कार्य* तस्‍वीर काफी कुछ बोल रही है
 उत्‍तराखण्‍ड के आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्यो का यह फोटो बहुत कुछ बयान कर रहा है, तस्‍वीर काफी कुछ बोल रही है, राहत एवं बचाव कार्य चल रहे हैं, वही उत्‍तराखण्‍ड पुलिस वर्दी में छाता लगाये खडी है-  राज्यपाल महोदय का बयान आ रहा है कि मानसून के शुरूआत में ही हालात गंभीर संकेत दे रहे हैं- ऐसे गंभीर समय में मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को कैसे निकाला जायेगा, बचाव कार्य के दौरान फोर्स के हाथो में क्‍या होना चाहिए- इस बात की कमी उत्‍तराखण्‍ड पुलिस को देखकर लग रही है कि आपदा टेनिंग में कही काफी कुछ कमी है-Bureau;  हिमालयायूके डॉट ओआरजी न्‍यूज पोर्टल    ब्‍यूरो रिपोर्ट-
#आपदा प्रबन्धन एवं राहत-बचाव कार्यों के संदर्भ में राज्यपाल के दिशा-निर्देश #मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शनिवार को कैबिनेट बैठक में मंत्रिमण्डल के सदस्यों के साथ आपदा राहत कार्यों की समीक्षा की# समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री श्री रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लायी जाय प्रदेश को जल्द ही लोकायुक्त मिल जाएगा#आज जमाना कम्पीटीटीव एक्सीलेंस का है राजपाल बिश्ट को युवा कांग्रेस एवं एनएसयूआई के साथ समन्वय का दायित्व #

मुख्य सचिव श्री शत्रुघ्न सिंह से वार्ता कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत व बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी ली वही मुख्‍यमंत्री ने  राज्य सरकार के विभागों, पुलिस, एस.डी.आर.एफ. के साथ एन.डी.आर.एफ. और आई.टी.बी.पी. के जवान राहत एवं बचाव कार्यों में तैनात किये जाने की बात की;
राजभवन देहरादून, दिनांक 02 जुलाई, 2016  द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्‍ति के अनुसार-
पिछले लगभग 40 घंटों में पिथौरागढ़ तथा चमोली जनपद में हुई अतिवृष्टि और भूस्खलन के कारण दोनों ही जनपदों में जन-धन की भारी क्षति तथा जन-जीवन अव्यवस्थित होने पर राज्यपाल डा0 कृष्ण कांत पाल ने गहरी चिन्ता और दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने मुख्य सचिव श्री शत्रुघ्न सिंह से वार्ता कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत व बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी ली।
राज्यपाल ने कहा कि मानसून के शुरूआत में ही ऐसे हालात गंभीर संकेत दे रहे हैं। आगामी दिनों में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए आपदा प्रबन्धन से जुड़े सभी विभागों को बेेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्हांेने, मौसम विभाग द्वारा लगातार दी जारी चेतावनी को संज्ञान में रखते हुए आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिये जानेे को कहा है।
राज्यपाल ने अपेक्षा की है कि सभी राहत-बचाव दलोें को सक्रिय किये जाने के साथ ही संचार व यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष प्रयास किये जायंे ताकि विपरीत परिस्थितियों में आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक बचाव व राहत पहुँचाने में कोई परेशानी न हो।
राज्यपाल ने आपदा प्रभावित व आपदा संभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री, दवाईयां/चिकित्सा सुविधा, पेयजल तथा अन्य सभी आवश्यक सामानों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि आपदा से संभावित क्षति को न्यूनतम अथवा शून्य करने के लिए सभी प्रयास समन्वित रूप से किये जाने के साथ ही जान-माल की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानी बरतने हेतु व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी निरन्तर चलाया जाना आवश्यक है।
राज्यपाल ने मुख्य सचिव से यह भी कहा कि तात्कालिक राहत कार्यों के साथ ही समानान्तर रूप से, राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा सम्बन्धी समस्याओं के स्थाई प्रबन्धन/समाधान के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाना होगा।
राज्यपाल, आपदा प्रबन्धन व वर्तमान हालातों पर स्वयं भी लगातार नजर रखे हुए हैं। आपदा की संभावनाओं के दृष्टिगत ही राज्यपाल ने आपदा प्रबन्धन से जुडे़ राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 24 जून को एक महत्वपूर्ण बैठक की थी जिसमें संभावित आपदा से निबटने की तैयारियों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए थे।

वही दूसरी ओर
ऽ मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कैबिनेट बैठक में की आपदा राहत कार्यों की समीक्षा
ऽ राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के अधिकारियों को दिये निर्देश
ऽ चारधाम यात्रा में यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिये सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे।
ऽ प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवासीय व्यवस्था
ऽ दो सौ से अधिक प्रभावित व्यक्तियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया
ऽ राज्य सरकार के विभागों, पुलिस, एस.डी.आर.एफ. के साथ एन.डी.आर.एफ. और आई.टी.बी.पी. के जवान राहत एवं बचाव कार्यों में तैनात
ऽ पिथौरागढ़ एवं चमोली में प्राकृतिक आपदा में 15 मृत, 21 लापता।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शनिवार को कैबिनेट बैठक में मंत्रिमण्डल के सदस्यों के साथ आपदा राहत कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री श्री रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लायी जाय। राहत एवं बचाव कार्य के लिए प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों व कर्मचारियों को जो भी सहयोग चाहिए व तत्काल उपलब्ध कराया जाय। हैलीकाॅप्टर के माध्यम से घायलों को उपचार हेतु देहरादून स्थित हायर सेंटर लाया जाय। सचिव आपदा प्रबंधन द्वारा बताया गया कि पिथौरागढ़ व चमोली में प्राकृतिक आपदा में 15 मृत हुए है, जबकि 21 लापता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि चारधाम यात्रा के यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिये सभी कदम उठाये जाये। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ और चमोली हुई दैवीय आपदा की घटनाआं के कारण चारधाम यात्रा पर असर न पड़े। चारधाम यात्रा मार्ग पर एस.डी.आर.एफ. और जिला प्रशासन द्वारा सभी उपाय सुनिश्चित किये जाय। मौसम विभाग द्वारा प्रदेश के जिन स्थानों के लिए चेतावनी जारी की जा रही है, वहां पर विशेष चैकसी बरती जाय। यात्रियों को मौसम के संबंध में पूर्व सूचनाएं उपलब्ध करायी जाय। चिकित्सकों की टीम को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया जाय। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि संवेदनशील क्षेत्रों में मोबाईल जेनेरेटर की व्यवस्था की जाए। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी व राशन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग, उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन तथा पेयजल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिये है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे कार्यों का प्रतिदिन अद्यतन रिपोर्ट वेबसाइट आदि माध्यमों से सार्वजनिक की जाय, ताकि जनसामान्य को जानकारी मिलती रहे। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने जनता से अपील की कि अत्याधिक वर्षा के कारण मानव क्षति हुयी है, परन्तु स्थिति अभी काबू में है। जनजीवन सामान्य है। चारधाम यात्रा बाधित नहीं हुयी है। यातायात व्यवस्थित तरीके से चल रहा है। जहाँ यातायात बाधित हो रहा है, वहां पर त्वरित कार्यवाही करते हुए मार्ग खोले जा रहे हैं।
सचिव आपदा प्रबंधन ने बताया कि 200 से अधिक व्यक्तियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया है। आपदा प्रभावितों परिवारों के लिए अस्थायी आवास के लिए टैन्ट व खाद्यान्न उपलब्ध करा दी गयी है। प्रभावित परिवारों को राहत शिविर में रखा गया है। तहसील डीडीहाट के बस्तड़ी ग्राम में स्कूल एवं पंचायतघर में 50 लोगों को ठहराया गया है। तहसील मुनस्यारी के ग्राम नौलाड़ा में जू0 हाईस्कूल में 25 लोगों को ठहराया गया है। तहसील डीडीहाट के ग्राम मल्ला पत्थरकोट में प्राथमिक विद्यालय पत्थरकोट में 15 लोगों को ठहराया गया है। तहसील डीडीहाट के ग्राम सिंघाली में राजकीय इन्टर काॅलेज सिघाली में 150 लोगों को ठहराया गया है।
बीजापुर अतिथि गृह में कैबिनेट मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं अन्य मंत्रियों ने राज्य में हुई अतिवृष्टि से आई आपदा में चल रहे राहत कार्याें की समीक्षा की। इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन शैलेश बगोली द्वारा आपदा की अद्यतन स्थिति एवं सरकार द्वारा संचालित राहत एवं बचाव कार्या के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया। मुख्यमंत्री श्री रावत द्वारा आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि आपदा राहत कार्या में और तेजी लायी जाय तथा मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान भारी वर्षा को देखते हुए हर समय अलर्ट रहें।
विगत दिन हुई अतिवृष्टि से विभिन्न स्थानों पर प्राप्त क्षति की सूचना के अनुसार जनपद पिथौरागढ़ के डीडीहाट एवं थल तहसील में अत्याधिक वर्षा से त्वरित बाढ़ व मलवा आने की घटनायें हुई हैं। ग्राम सिगांली, दाफीला, बस्तड़ी एवं नौलड़ा क्षेत्र में अत्याधिक वर्षा से वर्तमान तक लगभग 160 परिवारों के प्रभावित होने के साथ ही नौलड़ा गांव में 02, बस्तड़ी में 09, चर्मा में 01 मानव हानि हुई। इस प्रकार कुल 12 मानव हानि, 03 व्यक्ति गम्भीर घायल, 10 व्यक्ति सामान्य घायल एवं 15 लापता होने की सूचना है। 03 गम्भीर घायलों को हैलीकाप्टर से जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ में लाया गया है। अन्य घायलों को उपचार हेतु आई0टी0बी0पी0 के मिर्थी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुल पशुहानि 160 (बडे पशु 47 एवं छोटे पशु 113) हैं। साथ ही जनपद पिथौरागढ़ से 12 भवन आंशिक एवं 04 भवन पूर्ण क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है।
आपदा प्रभावितों परिवारों के लिए अस्थायी आवास के लिए टैन्टों व खाद्यान सामग्री उपलब्ध करा दी गयी है। प्रभावित परिवारों को राहत शिविर में रखा गया है। तहसील डीडीहाट के बस्तड़ी ग्राम में स्कूल एवं पंचायतघर में 50 लोगों को ठहराया गया है। तहसील मुनस्यारी के ग्राम नौलाड़ा में जू0 हाईस्कूल में 25 लोगों को ठहराया गया है। तहसील डीडीहाट के ग्राम मल्ला पत्थरकोट में प्राथमिक विद्यालय पत्थरकोट में 15 लोगों को ठहराया गया है। तहसील डीडीहाट के ग्राम सिंघाली में राजकीय इन्टर काॅलेज सिघाली में 150 लोगों को ठहराया गया है। पिथौरागढ़ में जौलजीबी व बरम के बीच खनपेरा के पास नाले में उफान आने से 02 पुल एवं ग्रैफ का डिपो भी बह जाने की सूचना प्राप्त हुई हैै।
जनपद पिथौरागढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग एंव ग्रामीण मोटर मार्ग भूस्खलन/मलवा से गुलेणी, बन्दरलिमा व रणगांव के समीप अवरूद्ध है। थल-मुनस्यारी मार्ग भूस्खलन एवं मलवा आने से अवरूद्ध है। अवरूद्ध मार्गों को खोलने हेतु बी0आर00 एवं जे.सी.बी. द्वारा कार्य किया जा रहा है। उपरोक्त सभी प्रभावित ग्रामों में विद्युत, दूरसंचार एवं जल आपूर्ति बांधित है, जिसे सुचारू किया जा रहा है। खोज बचाव एवं राहत कार्य हेतु एस0डी0आर0एफ0, एन0डी0आर0एफ0, एस0एस0बी0, आसाम रेजीमेन्ट, आई0टी0बी0पी0, खोज एवं बचाव दल डी0एम0एम0सी0 तथा पुलिस फोर्स तथा राजस्व विभाग की टीम द्वारा प्रभावित स्थलों में राहत बचाव का कार्य किया जा रहा है।
विगत दिन हुई अतिवृष्टि से जनपद चमोली के तहसील घाट एवं तहसील चमोली के ग्राम सिरजी, जाखण़ी, वादुक, गौली में अतिवृष्टि/भूस्खलन से 03 मानव हानि (2 सिरजी (सैंजी) व 1 वादुक गांव) एवं 06 लापता, 24 पशुहानि, (20 बड़े, 04 छोटे) 02 भवनों के क्षतिग्रस्त एवं 05 गौशालाओं के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। खोज बचाव एवं राहत कार्य किया जा रहा है। ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग, परथादीप, मैठाणा एवं बाजपुर (कुहेड़) के पास मलवा आने से अवरूद्ध है। लो0नि0वि0 एवं ग्रैफ द्वारा राजमार्ग को खोलने का कार्य किया जा रहा है। अवरूद्ध 33 ग्रामीण मोटर मार्ग के खोलने की कार्यवाही गतिमान है।
मौसम विभाग द्वारा दिनांक 02.07.2016 को दोपहर 100 बजे, जारी पूर्वानुमान के अनुसार अगले 48 घण्टों में नैनीताल, उधमसिंह नगर, चम्पावत, अल्मोड़ा, पौड़ी, हरिद्वार, देहरादून व टिहरी जनपदों के कुछ स्थानों में भारी (65-116 मि.मी.) से बहुत भारी (116-204) वर्षा के साथ ही कहीं-कहीं अत्यधिक भारी की संभावना व्यक्त की गई है। साथ ही दिनांक 02.07.2016 की दोपहर 1.00 बजे से अगले 48 घण्टों में विशेषकर उत्तरकाशी, चमोली, रूद्रप्रयाग, बागेश्वर व पिथौरागढ़ में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गयी।
आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा राज्य में सभी नागरिकों से सतर्क रहने का अनुरोध किया जा गया है तथा सभी जिलाधिकारियों द्वारा नदी के आस-पास संवेदनशील क्षेत्रों की बसावटों में एनाउन्समेट के साथ-साथ सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
शनिवार को बीजापुर हाउस में लोकायुक्त सेलेक्शन कमेटी की बैठक में सर्च कमेटी की संस्तुतियों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, जस्टिस वी.के.बिष्ट व जस्टिस इरशाद हुसैन सहित सचिव अरविंद ह्यांकि उपस्थित थे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री श्री रावत ने मीडिया को बताया कि प्रदेश को जल्द ही लोकायुक्त मिल जाएगा। इस दिशा में हम आगे बढ़े हैं। बैठक में नेता प्रतिपक्ष सहित सभी सदस्यों ने अपनी बात रखी और पूरी आशा है कि जल्द ही लोकायुक्त संस्था का गठन हो जाएगा।
आधुनिकता व तकनीक के साथ ही परम्परागत संस्कारों का भी समान महत्व है। गुरू का सम्मान जीवन में आगे बढ़ने के लिए बहुत जरूरी है। शनिवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एसजीआरआर इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साईंस, पटेलनगर में आयोजित कार्यक्रम में ये बात कही। कार्यक्रम में एसजीआरआर एजुकेशन मिशन के उत्कृष्ट छात्रों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि आज जमाना कम्पीटीटीव एक्सीलेंस का है।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि तरक्की के लिए निरंतर आगे बढ़ता रहना है। यह बात जितनी व्यक्तिगत तौर पर सही है, उतनी ही संस्थागत व राज्य के तौर पर भी सही है। राज्यों में भी विकास की प्रतियोगिता है। हमें राज्य के रूप में अपना अस्तित्व बनाए रखना है तो दूसरे राज्यों से आगे निकलना होगा। अवसर सभी को मिलते हैं, उन अवसरों का समय पर उपयोग महत्वूपर्ण है।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने समय तेजी से बदल रहा है। कैम्पस सेलेक्शन के साथ ही स्पोंसर्ड एजुकेशन प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में सहायक हैं। प्रतिभाएं धन की कमी के कारण पीछे नहीं रहती है। प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए बहुत सी संस्थाएं आगे आ रही हैं। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हमें एसजीआरआर पर गर्व है। शिक्षा को ऊंचाई की ओर ले जाने के लिए संस्थान प्रयासरत है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने खेल, शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने वाले संस्थान के छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया।
देहरादून 2 जुलाईः
प्रदेष कंाग्रेस अध्यक्ष श्री किषोर उपाध्याय ने पार्टी संगठन की मजबूती के दृश्टिगत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रदेष कांग्रेस कमेटी के महामंत्री श्री राजपाल बिश्ट को युवा कांग्रेस एवं एनएसयूआई के साथ समन्वय का दायित्व सौंपा गया है, प्रदेष कांगे्रस कमेटी के प्रवक्ता श्री नितिन पन्त सह समन्वयक होंगे। प्रदेष कांग्रेस कमेटी द्वारा युवा कांग्रेस तथा एनएसयूआई के प्रदेष अध्यक्षगणों से अपेक्षा की गई है कि वे प्रदेष कांग्रेस कमेटी के दोनों पदाधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुए पार्टी संगठन की मजबूती के लिए अपने संगठन की भागीदारी सुनिष्चित करेंगे।
उपरोक्त जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस  के मुख्य प्रवक्ता मथुरादत्त जोषी ने बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी संगठन की मजबूती के साथ-साथ कांग्रेस संगठन के सभी अंगों के साथ बेहतर समन्वय के लिए यूवा कांग्रेस एवं एनएसयूआई से समन्वय हेतु प्रदेष महामंत्री राजपाल बिश्ट केा समन्वयक तथा प्रदेष प्रवक्ता नितिन पन्त को सह समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही प्रदेष कांग्रेस कमेटी की ओर से नियुक्त समन्वयक एवं सह समन्वयक से भी अपेक्षा की जाती है कि अपने दायित्वों का भलीभांति निर्वहन करते हुए दोनों अनुशांगिक संगठनो से समन्वय स्थापित करते हुए पार्टी संगठन की मजबूती सुनिष्चित करेंगे।
मुख्य प्रवक्ता ने यह भी जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष श्री किषोर उपाध्याय ने पार्टी संगठन का विस्तार करते हुए पार्टी के वरिश्ठ नेता श्री याकूब सिद्धिकी को प्रदेष कांग्रेस जन षिकायत विभाग का गढ़वाल मण्डल संयोजक तथा श्री गणेष उपाध्याय को कुमाऊं मण्डल का संयोजक नियुक्त किया है। श्री याकूब सिद्धिकी एवं श्री गणेष उपाध्याय का पद प्रदेष कांग्रेस कमेटी के महामंत्री के समकक्ष होगा।
प्रदेष अध्यक्ष श्री किषोर उपाध्याय ने सभी पदाधिकारियेां से अपेक्षा की है कि वे अपने दायित्वों का भलीभांति निर्वहन करेंगे।


मथुरादत्त जोशी

Post a Comment Blogger Disqus

 
Top