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हरिद्वार 7 जुलाई 2016: प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी परियोजना नमामि गंगे' का शुभारंभ आज उत्तराखंड से केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी और उमा भारती की मौजूदगी में इसकी शुरुआत हुई. गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत आज देशभर में विभिन्न स्थानों पर 231 परियोजनाओं की शुरुआत की गयी, जिसमें नदी को साफ करने के लिए एसटीपी संयंत्र स्थापित करने की योजना शामिल है. इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि गंगा सफाइ अभियान में वे केंद्र के साथ हैं. उन्होंने कहा कि 'नमामि गंगे' स्वागत योग्य योजना है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने स्तर से गंगा सफाई का हर संभव प्रयास किया.
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने बताया कि ये परियोजनाएं उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और दिल्ली में शुरु की जा रही हैं. इन परियोजनाओं में घाटों का नवीनीकरण, जलमल शोधन संयंत्र स्थापित करना, वृक्षारोपण एवं जैव विविधता संरक्षण शामिल है. यह योजना प्रारंभ में एक साथ 104 स्थानों पर सभी पांच गंगा बेसिन वाले राज्यों में शुरू की जायेगी. उत्तराखंड के देहरादून, गढवाल, टिहरी गढवाल, रुद्र प्रयाग, हरिद्वार और चमोली जिलों में 47 परियोजनाएं शुरू की जाएंगी.
मुख्य कार्यक्रम हरिद्वार में आयोजित किया गया उमा भारती के साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, चौधरी बीरेन्दर सिंह और महेश शर्मा मौजूद रहे. उमा भारती ने संवाददाताओं से कहा, ‘यह ऐतिहासिक क्षण है, पहली बार गंगा नदी को साफ करने की दिशा में समग्र प्रयास हो रहे हैं. हम गंगा की सफाई का पहला चरण अक्तूबर 2016 में देखेंगे जबकि दूसरा चरण अगले दो वर्षो में पूरा होगा.' उन्होंने कहा कि सरकार एक ऐसा ऐप पेश करेगी जो नदी में प्रदूषण के स्तर की निगरानी करेगा. इस दौरान गडकरी के साथ नवनियुक्त राज्य मंत्री विजय गोयल और संजीव बालयान भी मौजूद थे.
परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद परियोजनाएं पेश की जा रही है और इसमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया है. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 20 परियोजनाएं पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना, नदिया, दक्षिण 24 परगना और हावडा जिलों में शुरु की जाएंगी. बिहार के बक्सर, वैशाली, सारण, पटना और भागलपुर जिलों में 26 परियोजनाएं शुरू की जाएगी. मुख्य कार्यक्रम पटना में आयोजित होगा.
उत्तर प्रदेश के अमरोहा, बिजनौर, हापुड, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मथुरा, इलाहाबाद, वाराणसी, फर्रुखाबाद और कानपुर जिलों में 112 परियोजनाएं शुरू की जाएंगी. नरोरा, मथुरा, वाराणसी और कानपुर में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. गंगा ग्राम योजना का उल्लेख करते हुए भारती ने कहा कि इस योजना के पहले चरण में गंगा के तट पर बसे 400 गांवों का विकास किया जाएगा. उन्होंने बताया कि देश के 13 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों ने ऐसे 5-5 गांवों का विकास करने की जिम्मेदारी ली हैं. इन गांवों के 328 सरपंचों को अब तक पंजाब के सींचेवाल गांव ले जाया गया है जहां उन्होंने सींचेवाल के विकास की जानकारी ली.
उमा भारती ने बताया कि गंगा के किनारे आठ जैव विविधता संरक्षण केंद्रों का विकास किया जाएगा. ये केंद्र रिषिकेश, देहरादून, नरोरा, इलाहाबाद, वाराणसी, भागलपुर, साहिबगंज और बैरकपुर में स्थापित किए जा रहे हैं. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन घाटी आधारित समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए राष्ट्रीय गंगा नदी प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले पांच राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण, जलीय संसाधन संरक्षण और संस्थागत विकास परियोजनाओं को लागू करने का निरंतर प्रयास कर रहा है. इन्हीं प्रयासों के अंतर्गत ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करने हेतु गंगा के किनारे बसे शहरों एवं 1657 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों के साथ जन जागरुकता बढाने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा नियमित संवाद किया जा रहा है तथा उन्हें नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत क्रियान्वित की जा रही विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया जा रहा है.

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