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नई दिल्ली 11जुलाई2016 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले उद्योगपति गौतम अडानी के कांग्रेस के आरोपों का दो टूक जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उनके बारे में जो बातें कहीं हैं उनमें तथ्यात्मक गलतियां हैं. अडानी ने आरोप लगाया है कि जयराम रमेश 'राजनीतिक सुविधा' के आधार पर दलील देते हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि नरेंद्र मोदी को उन्होंने कभी मुफ्त में विमान की सेवा नहीं दी. बता दें कि कांग्रेस ने इससे पहले आरोप लगाए थे कि लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी के अडानी के विमान के उपयोग किया. इस पर अडानी ने कहा कि उनके कॉरपोरेट ग्रुप के पास चार विमान हैं और कोई भी उनका मुफ्त में उपयोग नहीं करता. अंग्रेजी अखबार 'ईटी' के मुताबिक, अडानी ने कहा, 'क्या कांग्रेस भी कमर्शियल बेसिस पर जीएमआर के विमान का इस्तेमाल नहीं करती है? केवल मोदी के बारे में बात क्यों हो रही है? वह मुफ्त में अडानी के विमान का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.' देश के प्रमुख कारोबारियों में शुमार अडानी ने कहा, 'मुझे अब लग रहा है कि कांग्रेस गलती से नहीं, बल्कि जानबूझकर मेरे बारे में आरोप लगा रही है.' जयराम रमेश के आरोपों का जवाब देते हुए गौतम अडानी ने कहा, 'पर्यावरण मंत्री के रूप में रमेश ने छत्तीसगढ़ में माइनिंग प्रॉजेक्ट को क्लीयरेंस दी थी. यूपीए शासन में पर्यावरण मंत्री के रूप में पद छोड़ने से पहले यह उनका आखिरी एग्जिक्यूटिव ऑर्डर था.' अडानी ने कहा कि रमेश बुनियादी रूप से गलत बात कर रहे हैं, क्योंकि वह माइन अडानी ग्रुप की नहीं, बल्कि राजस्थान सरकार की है और उनका ग्रुप महज माइनिंग कॉन्ट्रैक्टर था. अडानी ने आगे कहा, 'माइन राजस्थान सरकार की है. यह सब तब हुआ, जब राजस्थान में कांग्रेस सरकार थी. इस माइन के लिए मंजूरी खुद जयराम रमेश ने दी थी.' अडानी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और इंडस्ट्री के बीच सांठगांठ साबित करने की कांग्रेस की कोशिश पहले भी विफल हो चुकी है और इंडिया इंक के ज्यादातर लोग अभी पक्षपात न करने की मोदी की शैली से तालमेल बैठाने में लगे हैं. गौरतलब है कि कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गुजरात में अडानी ग्रुप का एक प्रोजेक्ट पर्यावरण नियमों का कथित उल्लंघन करते हुए लगाया गया. 200 करोड़ रुपये का जुर्माना नहीं चुकाया गया और छत्तीसगढ़ में एक माइनिंग प्रोजेक्ट में ग्रुप का खास ख्याल रखा गया. इस पर अडानी ने कहा कि यूपीए सरकार की ओर से बनाई गई कमिटी ने जिस जुर्माने की सिफारिश की थी, उसका कोई कानूनी आधार नहीं है. अडानी ने कहा कि न तो पिछली और न ही मौजूदा सरकार जुर्माने के आदेश को असल में लागू कर सकती है. अडानी ने कहा कि अगर पिछली सरकार इतनी ही तैयार थी और आरोप अगर सही थे, तो उन्होंने नौ महीनों से ज्यादा तक इंतजार क्यों किया? एनडीए सरकार ने मामले की जांच में सालभर लगाया. उन्होंने जल्दबाजी नहीं की. ये लोग अडानी का पक्ष नहीं ले रहे हैं.'


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