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नई दिल्ली। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए दिल्ली दर्शन का सिलसिला अचानक बढ़ गया है। सोनिया गांधी से बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन सिंह घटवार की तकरीबन बीस मिनट की मुलाकात ने दिवंगत अंजन दत्त की जगह लेने के इच्छुक नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। हालांकि एक बार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके घटवार ने सफाई दी है कि वे इस होड़ में कतई नहीं हैं।
बीते मंगलवार को दिवंगत प्रदेश अध्यक्ष दत्त के आद्य श्राद्ध के बाद से राज्य के कांगे्रस नेता थोड़े खुलकर  इस पद के लिए जुगाड़ बैठाने में लग गए हैं। इस बीच हाल ही में विधानसभा चुनाव हारे घटवार कांग्रेस प्रमुख के बुलावे पर आज उनसे मिले। मुलाकात के बाद उन्होंने कांग्रेस की आम परंपरा के अनुसार खुद को प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर बताया। वैसे उन्होंने यह भी कहा कि हाईकमान  जो निर्देश देगा उसका पालन तो करना पड़ेगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री के मुताबिक कांग्रेस प्रमुख से प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के नाते सोनिया गांधी ने उनको असम में संगठन को मजबूत करने के तौर-तरीकों पर अमल करने को कहा है। राज्य में पार्टी के घटते जनाधार और इसके सांगठनिक ढांचे को बेहतर बनाए जाने को लेकर दोनों के बीच चर्चा हुई है। यह मुलाकात सोनिया के निवास पर बुधवार सुबह हुई। उन्होंने यह उम्मीद अवश्य जताई कि हाईकमान जल्द ही अध्यक्ष पद के बारे में कोई निर्णय लेगा।
 प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष पद के लिए घटवार के अलावा उपाध्यक्ष रिपुन बोरा, एआईसीसी सचिव भूपेन बोरा, पूर्व मंत्री प्रद्युत बरदलै और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के सांसद पुत्र गौरव गोगोई के नामों की चर्चा चल रही है। हालांकि कांग्रेस से जुड़े सूत्र की मानें तो इस दौड़ में रिपुन बोरा तथा प्रद्युत बरदलै का नाम सबसे आगे है। लेकिन आखिरी फैसला पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ही लेंगी।
 दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर आपसी गुटबाजी बढ़ती जा रही है। इस वजह से पार्टी आलाकमान जल्द ही फैसला लेने को बाध्य हो सकता है। राज्य में कांगे्रस सरकार के दिनों में हिमंत वाहिनी के विद्रोह पर बहुत लंबे समय तक हाईकमान की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिए जाने का खामियाजा इसको भोगना पड़ा है। ऐसे में एआईसीसी सूत्रों के मुताबिक इस बार हाईकमान सतर्क है।
 गौरतलब है कि कई राज्यों में पार्टी के नेताओं के छोड़ कर चले जाने या पार्टी आलाकमान के खिलाफ बयानबाजी को देखते हुए असम के साथ ही कांग्रेस चार राज्यों में नए अध्यक्षों का बदलाव करने जा रही है। चर्चा है कि उत्तर प्रदेश में भी नए पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है। वहीं बिहार में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी को राज्य सरकार में मंत्री बनाया जा चुका है। इसलिए "एक व्यक्ति एक पद' नियम के तहत उनकी जगह किसी और को राज्य संगठन की कमान सौंपी जाएगी। तमिलनाडु में मौजूदा अध्यक्ष ईवीकेएस इलनगोवन ने हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद इस्तीफा दे दिया है। वहां भी नए अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है। जबकि पिछले दिनों निजी कारणों से सक्रिय राजनीति छोड़ने की घोषणा करने वाले गुरुदास कामत के राजनीति में बने रहने पर पार्टी उनकी जगह अन्य किसी नेता को फिलहाल नहीं खोज रही है। कामत के पास महासचिव के तौर पर गुजरात और राजस्थान की कमान है।

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