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मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने सेंसर बोर्ड से इस बात का स्पष्टीकरण देने को कहा कि वह ‘‘उड़ता पंजाब’’ से पंजाब शब्द हटाने पर जोर क्यों दे रहा है जबकि फिल्म संस्था ने कहा कि उसकी समीक्षा समिति द्वारा सुझाए गए 13 बदलाव समुचित और वैध हंै।  

http://images.prabhatkhabar.com/gall_content/2015/8/2015_8$largeimg210_Aug_2015_173504950.jpgन्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी की अध्यक्षता वाली पीठ ‘‘उड़ता पंजाब’’ के निर्माता फेंटम फिल्म्स द्वारा दाखिल याचिका की सुनवाई कर रही थी। 

निर्माता बोर्ड की समीक्षा समिति के आदेश से प्रभावित हैं जिसने फिल्म के 17 जून को प्रदर्शन से पहले उसमें बदलाव करने का सुझाव दिया है।
न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने नशीले पदार्थों की लत पर बनी ‘‘उड़ता पंजाब’’ की तुलना पूर्व में जारी एक अन्य फिल्म ‘‘गो, गोवा गोन’’ से करते हुआ कि फिल्म में गोवा की स्थिति दर्शायी है जहां लोग पार्टी में मेलजोल बढ़ाने के लिए जाते हैं तथा प्रतिबंधित दवाएं लेते हैं। 

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यदि गोवा फिल्म में दवाओं के दुरूपयोग के स्थल के रूप में दिखाया जा सकता है तो उड़ता पंजाब में पंजाब को दिखाने में क्या बुराई है।’’

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