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नयी दिल्ली -- केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने बकरियो के प्रबन्धन पर ई सॉफ्टवेयर का शुभारंभ किया  सिंह ने इस अवसर पर कहा कि पशु अनुवंशिक संसधनो का वैज्ञानिक वैज्ञानिक प्रबंधन एवं सरक्षण, वर्तमान में बदलती हुई जलवायु, वातावरण एवं औद्योगिकीकरण के युग में एक प्रमुख एवं जलन्त मुद्दा है, कहते है की सुधार तभी किया जा सकता है जब की वस्तु की मात्रा, गुणवत्ता ,एवं प्रकृति की पूरा आंकड़ा हो और उसमे विभिन्न कारणों से हो रहे परिवर्तनों से प्रभावित उत्पादन की दशा एवं दिशा का पूर्ण ज्ञान हो। 

 सिंह ने कहा कि इस सॉफ्टवेयर द्वारा देश की सभी बकरियों का वंशावली, उनका दूध, मास उत्पादन, जनन एवं प्रजनन क्षमता, होने वाली बिमारियों आदि का लेखा जोखा राष्ट्रीय स्तर पर रखा जा सकेगा।

कृषि मंत्री  ने कहा कि भारतीय पशुधन पर वैसे तो संख्या संबंधी आंकड़े उपलब्ध है लेकिन उनके स्थान विशेष पर उपलब्धता, उनके खान-पान की गुणवत्ता, मात्रा, उसमे कमी, होने वाली बिमारियों, उपचार के प्रबंध, प्रजनन क्षमता, अनुवांशिक सरचना, जनन क्षमता, जलवायु विशेष में उत्पादकता आदि पर आंकड़े उपलब्ध नहीं है। इससे नीतिगत फैसले लेने और उनके वैज्ञानिक प्रबंध संबंधी प्रोटोकॉल बनाने में कठनाई आती है। 

वर्तमान में अमेरिका, यूरोप एवं आस्ट्रेलिया महाद्वीपों में पशुधन की बहुत सारी प्रजातियों के प्रत्येक पशु के व्यक्तिगत पहचान नंबर उनकी गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता, एवं आनुवंशिकी सरचना पर ई-डाटाबेस में आंकड़े उपलब्ध है। इन आंकड़ों को प्रतिदिन आधुनिक बनाया जाता है। इस तरह की व्यवस्था एशिया एवं अफ्रीका महद्वीपो के बहुत देशो में अभी नहीं हो पाई है।

  सिंह ने बताया कि विश्व पशुधन के प्रबंधन पर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने २००७ इंटरलाकिन घोषणा पत्र जारी किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देशो को अपने पशुधन की पहचान कर, व्यख्या करना, उनके गुणदोष पर आंकड़े इकठ्ठा कर, एक खाका तैयार करना, जिससे की उनके प्रबंध पर उचित नीतियां बनाई जा सके। अपने दोष को इस तरह उत्तरदायित्व को अभी पूरा करना है।

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बकरी आनुवंशिकी संसाधनों के प्रबंध हेतु वर्ष २०१५-१६ में एक सॉफ्टवेयर का निर्माण किया है, जिसकी क्षमता देश की सभी बकरियों का वंशावली, उनका दूध, मास उत्पादन, जनन एवं प्रजनन क्षमता, होने वाली बिमारियों आदि का लेखा जोखा राष्ट्रीय स्तर पर रखा जा सकेगा। 

केंद्रीय बकरी अनुसधान संस्थान मथुरा द्वारा विकसित ई-फॉर्मेट में इस सॉफ्टवेयर में आंकड़े भरे जाने के बाद देश में पाई जाने वाली बकरियों के सुधार पर उचित नीति का निर्माण, उनका प्रबंधन तथा उनकी मार्केटिंग की जा सकती है। इसमें किसानों तक बकरी पालन से संबंधित ज्ञान का आदान प्रदान उनकी अपनी भाषा में करने का प्रावधान भी रखा गया है इससे न केवल देश में बकरियों से अधिक उत्पादन लिया जा सकता है बल्कि उचित प्रबंध कर किसानों की आय भी बढ़ायी जा सकती है भविष्य के पीढ़ियों के लिए पशुधन के सरक्षण में साहयता होगी।

  सिंह ने जानकारी दी कि इस सॉफ्टवेयर में ऐसी सुविधा दी गई है की प्रत्येक बकरी के वंशावली, उनके मालिक का नाम, पैदा होने की जगह, नस्ल आदि पर आंकड़े ऑन -लाइन वेबसाइट के जरिये देश में कही से भी आ जा सकता है, इन आकड़ो के साथ साथ उनकी बिमारियों, खान-पान आनुवांशिकी सरंचना, जलवायु विशेष के प्रति उनकी सहिंशुता ई फॉर्मेट में ऑन लाइन उपलब्ध कराई जा सकेगी। बकरी के पहचान के लिए, भारत में मनुष्यो के लिए आधार नंबर की नीतियों पर आधारित एक राष्ट्रीय पहचान नंबर दिया जा सकेगा। 

उसी पहचान के बाद उस पशु विशेष के सभी आंकड़े उपलब्ध रहेंगे। वैसे तो यह सॉफ्टवेयर केवल बकरियों के लिए बनाया गया है लेकिन थोड़े परिवर्तनों के बाद इसका प्रभावशाली तरीके से अन्य पशु प्रजातियों के लिए सुधारा जा सकता है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस सॉफ्टवेयर के पूर्णत क्रियशील हो जाने के बाद बकरी प्रबंधन से संबंधित सभी आंकड़े उपलब्ध रहेंगे, जिससे विकास, एवं प्रबंधन हेतु सभी नीतियों एवं परियोजनाओं को बनाना आसान हो जायेगा तथा किसानों तक तुरंत आवश्यक सूचना पहुंचाई जा सकेगी।

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