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-प्रेमबाबू शर्मा


नई दिल्ली --  शारीरिक रूप से अशक्त होने के बावजूद सफलता की सीढ़ियां चढ़ने वाले लोगों को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस ने सलाम किया है। साल 2016 के लिए लिम्का बुक में शामिल15 दिव्यांगों में चार दिव्यांग दिल्ली से हैं। 


 इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित समारोह में लिम्का बुक में शामिल किए गए उन दिव्यांगों की की सूची जारी की गई। दिल्ली से मेजर देवेंद्र पाल सिंह, रणवीर सिंह सैनी, राजीव रतूड़ी और राधिका चंद को पीपुल ऑफ द ईयर की सूची में शामिल किया गया है। वहीं, बुक ऑफ रिकॉर्डस के ब्रेल संस्करण की शुरुआत करते हुए कोका कोला इंडिया और दक्षिणी-पश्चिमी एशिया के अध्यक्ष वेंकटेश किनी और लिम्का बुककी संपादक विजया घोष ने सुलभ अभियान से जुड़ने की घोषणा की।


 कार्यक्रम में इंफोसिस लिमिटेड के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने केंद्र सरकार से सांकेतिक भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर आधिकारिक भाषा का दर्जा दिए जाने की मांग की है।
रणवीर सिंह सैनी 14 साल के रणवीर सिंह सैनी जन्म से ही ऑटिस्टिक हैं, बावजूद उन्होंने स्पेशल ओलंपिक वल्र्ड गेम्स लॉस एंजिलिस में सबसे कम उम्र का पहला भारतीय गोल्फर रहते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया।


राजीव रतूड़ी केन्या में रहते हुए बुलेट इंजरी में आंख खो देने वाले राजीव रतूड़ी की आंखों में अंधेरा आया तो उन्होंने अपने कामों से रोशनी फैलानी शुरू की। राजीव पिछले 13 सालों से अशक्तों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।


देवेंद्र पाल सिंह कारगिल में दायां पैर खो देने वाले रिटायर्ड मेजर देवेंद्र पाल सिंह 2009 से ब्लेड प्रोस्थेटिक के सहारे मैराथनों में हिस्सा लेते रहे हैं। इन्होंने कृत्रिम पांव के सहारे 20 से ज्यादा मैराथन में हिस्सा लिया है।

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