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नयी दिल्ली -- भारतीय खिलाड़ियों को वर्ल्‍ड एंटी डोपिंग एजेंसी (डब्ल्यूएडीए) द्वारा प्रतिबंधित पदार्थ लेने के खतरों से अवगत कराने के लिए नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने आउटरीच कार्यक्रम प्रारंभ किया है। ऐसे मामलों पर खिलाडि़यों के बीच जागरूकता बढ़ने से इस प्रकार के मामलों में कमी आने की संभावना है। 

नाडा खेलों में डोपिंग के बारे में जागरूकता फैलाने से संबंधित मामलों को देखती है, इनमें सूचना का प्रसार, शिक्षण सत्रों/विचार गो‍ष्ठियों/कार्यशालाओं के माध्‍यम से खिलाडि़यों, कोच और सहायकों को डोपिंग के दुष्‍प्रभावों के बारे में जानकारी प्रदान करना तथा स्‍पर्धा में भाग ले रहे तथा स्‍पर्धा से बाहर खिलाडि़यों पर डोप परीक्षण करना शामिल हैं।

नाडा ने अक्‍टूबर 2014 से ‘प्रोग्राम फॉर एजुकेशन एंड अवेयरनेस ऑन एंटी डोपिंग इन स्‍पोर्ट्स (पीईएडीएस) प्रारंभ किया है। इसका उद्देश्‍य देश भर में डोपिंग के खिलाफ संघर्ष है। इसके तहत देशभर में खेलों के सभी स्‍तरों पर कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं।

इस पहल के तहत हितधारकों के साथ मिलकर खेल संगठनों, राज्‍य खेल प्राधिकरणों और शारीरिक शिक्षा विभागों/कॉलेजों/विश्‍वविद्यालयों के सहयोग से कुल 64 ऐसे शैक्षिक कार्यक्रम/एंटी डोपिंग कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है।

इसके अतिरिक्‍त नाडा द्वारा हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, बांग्‍ला, असमी, गुजराती, मराठी, उड़िया, कश्मीरी और मणिपुरी सहित 14 भाषाओं में एंटी डोपिंग ब्रोशर/सूचना का अनुवाद और प्रकाशन किया गया है, ताकि देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में खिलाडि़यों को एंटी डोपिंग के बारे में जानकारी उपलब्‍ध कराना सुनिश्चित कराया जा सकें।

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