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काठमांडो  : नेपाल में पहली महिला सुशीला कार्की के रूप में देश को पहली कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश मिली हैं । नेपाल के उच्चतम न्यायालय की वरिष्ठतम न्यायाधीश 63 वर्षीय सुशीला ने वाराणसी के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान विषय में परास्नातक की डिग्री हासिल की है । भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने के लिए चर्चित सुशीला ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश कल्याण श्रेष्ठ की जगह ली है । 
वैसे सुशीला के नाम की संवैधानिक परिषद ने सिफारिश की थी लेकिन संसदीय सुनवाई समिति से गुजरे बिना शीर्ष पद पर उनकी औपचारिक नियुक्ति की घोषणा नहीं हो सकी । यह समिति कुछ तकनीकी कारणों से अभी गठित नहीं हो पाई है । इसलिए, सरकार ने कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति की । 


शीर्ष अदालत के कार्यवाहक प्रवक्ता बिश्वराज पौडियाल ने कहा कि सुशीला ने अभी पद और गोपनीयता की शपथ नहीं ली है । आठ साल पहले सुशीला की नियुक्ति अस्थाई रूप से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में हुई थी । इससे पहले वह वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में विधि क्षेत्र में सेवारत थीं । वह करीब छह साल पहले उच्चतम .न्यायालय की स्थाई न्यायाधीश बनी थीं । 
सुशीला ने वर्ष 1978 में नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय से विधि की डिग्री हासिल की थी । वह महिलाओं द्वारा अपनी नागरिकता अपने बच्चों को देने की अनुमति जैसे फैसले के लिए चर्चित हैं । पहले नागरिकता केवल पुरूषों से उनके बच्चों तक जाती थी ।


 पिछले साल अक्तूबर में बिद्या देवी भंडारी नेपाल की पहली महिला राष्ट्रपति बनी थीं । पिछले साल ही, नेपाल के विधिनिर्माताओं ने संविधान लागू होने के बाद नई सरकार गठित होने पर यूसीपीएन माओवादी की सांसद ओंसारी घारती मागर को संसद की पहली महिला स्पीकर बनाया था ।

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