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अगुस्‍ता वेस्‍टलैंड हेलीकॉप्‍टर खरीद का मामला निर्विदाद रूप से भ्रष्‍टाचार का मुद्दा है और खासकर घूसखोरी का। कुछ हलकों में इस पर लगाए जा रहे अन्‍य तरह के अनुमान, सोच गलत हैं और इस मामले में ये सब दिगभ्रमित करने और सच्चाई को छिपाने के प्रयास हैं और खुद को बचाने की प्रेरणा से प्रेरित हैं।
      
जब से नई सरकार को लोगों की सेवा की जिम्‍मेदारी दी गई है, यह पूरी गति से देश के आम लोगों के सशक्‍तिकरण के उद्देश्‍य से काम कर रही है। सरकार निर्बाध, पारदर्शी और निर्भीक रूप से सुशासन देने में तत्‍पर  है। हमारे सुशासन का एक मुख्‍य उद्देश्‍य भ्रष्‍टाचार का पता लगाकर उसको समूल रूप से खत्‍म करना और दोषियों को दंडित करना है।
      
यह सच में बेहद दु:खद है कि राजनीतिकों के एक छोटे से हलके ने इस सार्वजनिक चर्चा को इस मुद्दे से भटकाने का असफल प्रयास किया है। वे सरकारी प्रक्रिया की गति खासकर जांच पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन वे यह जानने की कोशिश नहीं कर रहे हैं कि खरीद प्रक्रिया को भ्रष्‍टाचारियों ने कैसे प्रभावित किया और राष्‍ट्र के साथ कैसे विश्‍वासघात किया। वे भ्रष्‍टाचार की बात स्‍वीकार न करते हुए ये कहते हुए नजर आ रहे हैं अगर हिम्‍मत है तो हमें पकड़ कर दिखाओ। मौजूदा सरकार ने इस मामले में सच्‍चाई को सामने लाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की है और कहा है कि वह भ्रष्‍टाचारियों एवं दोषियों को सजा दिलाने में कोई कसर बाकी नहीं रखेगी।
     

सरकार ने निरंतर और सक्रियता से अगस्‍ता वेस्‍टलैंड इंटरनेशनल और फिनमेकानिका के खिलाफ कार्रवाई की है। यह मौजूदा सरकार ही है, जिसने अपने 3 जुलाई 2014 के आदेश के माध्‍यम से सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में नामजद मेसर्स अगस्‍ता वेस्‍ट लैंड इंटरनेशनल लिमिटेड, यूके, मेसर्स फिनमेकानिका, इटली और इस समूह की सहयोगी और इससे संबंधित कंपनियों आईडीएस, ट्यूनीशिया, मेसर्स इंफोटेक डिजायन सिस्‍टम(आईडीएस), मॉरिशस मेसर्स आईडीएस इंफोटेक लिमिटेड, मोहाली और एरोमैट्रिक्‍स इंफो सोल्‍युशन प्राइवेट लिमिटेड चंडीगढ़ से किसी तरह की खरीद/अधिग्रहण पर तात्‍कालिक रूप से रोक लगा दी।

ऐसा करते वक्‍त सरकार ने अपने सुरक्षा बलों की तैयारी का नुकसान नहीं होने दिया। इसी दौरान यह भी सुनिश्चित किया कि कोई भी बड़ी खरीदारी मौजूदा सरकार आपने कार्यकाल में इन कंपनियों से नहीं करेगी।

विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा एक संयुक्‍त उपक्रम में शामिल अगस्‍ता वेस्‍टलैंड को लेकर भी एक भ्रामक सूचना फैलाई जा रही है। इस प्रस्‍ताव की मंजूरी 2 सितंबर 2011 को अगस्‍ता वेस्‍ट लैंड एनवी नीदरलैंड के साथ टाटा संस के साथ संयुक्‍त उपक्रम में शामिल इंडियन रोटोक्राफ्ट लिमिटेड के आवेदन के आधार पर दी गई थी। इसे बाद में पता चलने पर अगस्‍ता वेस्‍टलैंड एसपीए के रूप में बदल दिया गया। 7 फरवरी 2012 को औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग द्वारा इंडियन रोटोक्राफ्ट लिमिटेड का हेलीकॉप्‍टर बनाने के लिए औद्योगिक लाइसेंस मंजूर किया गया था लेकिन तब से इस लाइसेंस की वैधता समाप्‍त हो गई है।
    

भ्रष्‍टाचार से लोगों का ध्‍यान भटकाने के तहत चलाए जा रहे अभियान में कुछ लोगों का कहना है कि मोदी सरकार ने अगस्‍ता वेस्‍ट लैंड को 100 नवल यूटिलिटी हेलीकॉप्‍टर के लिए अप्रैल 2015 में बोली लगाने की अनुमति दी । हकीकत यह है कि नवल यूटिलिटी हेलीकॉप्‍टर के लिए तकनीकी-वाणिज्यिक आग्रह (आरएफपी) का प्रस्‍ताव 4 अगस्‍त 2012 को 4 विक्रेताओं को जारी किया गया। इस प्रस्‍ताव के जवाब में मेसर्स यूरोकॉप्‍टर, फ्रांस, मेसर्स अगस्‍ता वेस्‍टलैंड एसपीए इटली ने 4 मार्च 2013 को तकनीकी-वाणिज्यिक प्रस्‍ताव पेश किया। खरीदारी के इस आरएफपी को सरकार ने 13 अक्‍टूबर 2014 को वापस ले लिया।
    

भारतीय नौसेना ने अपनी वेबसाइट पर 100 नवल यूटिलिटी हेलीकॉप्‍टर की सूचना के लिए अक्‍टूबर 2014 को आग्रह पेश किया। प्रस्‍ताव के लिए किसी तरह का आग्रह जारी नहीं किया गया। ऐसे में अप्रैल, 2015 में नवल यूटिलिटी हेलीकॉप्‍टर के लिए बोली लगाने के लिए अगस्‍ता वेस्‍टलैंड को मंजूरी देने का सवाल ही नहीं उठता। सरकार इस बात की तलाश कर रही है कि क्‍या उनका निर्माण मेक इन इंडिया के तहत चलाया जा सकता है।   

भ्रष्‍टाचार के प्रमुख मुद्दे पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने कठोरता और बहुत ही मेहनत से कार्रवाई की है। इन एजेंसियों ने तीन विदेशियों की गिरफ्तारी और प्रत्‍यावर्तन सहित जांच के हर पहलू पर काम किया है। 

ज‍हां तक सीबीआई का सवाल है उसने 100  से अधिक गवाहों की जांच की है। वर्ष सितंबर और नवंबर 2014 में कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी संपत्ति कुर्क कर दी गई। एक आपराधिक शिकायत भी दर्ज कर ली गई।  ईडी और सीबीआई द्वारा मॉरीशस(जुलाई 2013) ट्यूनीशिया और इटली(दिसंबर2013),  ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड, सिंगापुर और यूके(सितंबर 2014) और स्विटजरलैंड (दिसंबर) 2014 को अनुरोध प्रत्र भेजा गया। एजेंसियां एलआर के जवाब के लिए संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं। इसके बाद भी इस दिशा में लगातार कार्यवाही करते हुए सीबीआई ने 24 सिंतंबर 2015 को क्रिश्‍चयन जेम्‍स मिशेल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। इंटरपोल के जरिेये दिसंबर 2015 और जनवरी 2016 में मनी लांड्रिंग एक्‍ट और भ्रष्‍टाचार निरोधक कानून के तहत साजिश रचने और मेसर्स एडब्‍ल्‍यूआईएल को मदद करने के लिए आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल के प्रत्‍यावर्तन के लिए भी आग्रह किया गया है। सीबीआई द्वारा यूके के अधिकारियों से प्रत्‍यावर्तन के लिए उसे तात्‍कालिक रूप से गिरफ्तार करने का भी आग्रह 4 जनवरी 2016 को किया गया है।

निजी मनी लांड्रिंग और विदेशी विनिमय की गडबडि़यों को पकड़ने वाली एक और स्‍वायत्‍त संस्‍था प्रत्‍यवर्तन निदेशालय ने भी 29 फरवरी 2016 को यूके को अलग से रेड कॉर्नर भेजकर उसकी गिरफ्तारी और प्रत्‍यावर्तन का आग्रह किया है।
 

जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल के द्वारा 08.11.2015 को सीबीआई और ईडी द्वारा भारतीय धरती पर सवाल पूछने के दिए गये कथित प्रस्‍ताव पर भाजपा और प्रधानमंत्री द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाकर भी कुछ लोगों ने वांछित अपराधी का ही साथ दिया है। गौरतलब है कि कानून की परिधि के बाहर किसी भी आरोपी से किसी तरह की समझ रखना/समझौता करना आपराधिक कृत्‍य है। जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल भारतीय कानून प्रत्‍यावर्तन एजेंसियों का एक वांछित अपराधी है। उसकी गिरफ्तारी और प्रत्‍यावर्तन कर भारत लाने के लिए सभी कानूनी साधनों का प्रयोग किया जा रहा हैं। मिशेल को तरह-तरह के बहाने तलाशने की बजाय अपने आपको भारतीय कानूनी व्‍यवस्‍था के समक्ष समर्पण कर देना चाहिए। वे हकीकत में आरोपी हैं। देश इस बात के प्रति दृढ़प्रतिज्ञ हैं कि मिशेल और उसके सहयोगियों के खिलाफ कानून अपना काम करेगा।
     

वे लोग जो प्रधानमंत्री को अपने उद्देश्‍यों में सफल होते नहीं देखना चाहते हैं वे ही उनपर इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। सच्‍चाई से परे कुछ भी नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने किसी भी प्रकार का कोई सौदा नहीं किया है। उनका एकमात्र लक्ष्‍य और प्राथमिकता, विकास और राष्‍ट्र को व्यापक मजबूती प्रदान करते हुए लोगों को सशक्‍त बनाना है।   
कुछ लोगों ने तो मौजूदा राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजित डोभाल और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव श्री नृपेंद्र मिश्र के साथ भी एक आरोपी के तार जोड़ दिए। ये पूर्णत: झूठा दावा है, किसी तरह के कारण और तर्क से रहित हैं और इससे उनकी दुर्भावना का संकेत मिलता है। वास्‍तविकता में इस तरह का कोई संबंध है ही नहीं।
  

कुछ क्षेत्रों में इस मामले में अपनी हदों को पार करते हुए राजस्‍थान तथा छत्‍तीसगढ़ की कैग रिपोर्ट पर कहा कि अगस्‍ता वेस्‍टलैंड हेलीकॉप्‍टर खरीद में कैग की आलोचना के बाद भी मोदी सरकार ने छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री श्री रमन सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई क्‍यों नहीं की। इससे सरकारी खजाने को (कैग के अनुसार) 65 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

लेकिन सरकार ने राज्‍य सरकार से भी जवाब लेने में सक्रियता दिखाई है। छत्‍तीसगढ़ की राज्‍य सरकार के अनुसार छत्‍तीसगढ़ विधानसभा की लोक लेखा समिति ने साल 2007 में की गई खरीद के संदर्भ में कैग की रिपोर्ट का संज्ञान लिया है। समिति ने राज्‍य के सरकारी अधिकारियों से सबूत भी लिए हैं। सबूतों के विश्‍लेषण करने और राज्‍य सरकार की रिपोर्ट के बाद लोक लेखा समिति ने इस मामले को बंद कर दिया है।
       

इसी तरह राजस्‍थान सरकार के मुताबिक कैग की रिपोर्ट में स्‍पष्‍ट किया गया है कि सार्वजनिक खजाने को कथित तौर पर हुआ घाटा खरीद प्रक्रिया में गड़बडी के कारण नहीं हुआ है। यह खर्च योजना बनाने में कमी, खरीद से पूर्व बुनियादी संरचना के अभाव जैसे पायलटों के प्रशिक्षण और रखरखाव के कारण हुआ है। यह खरीद भी 2005 में ही हुई थी।
  
सरकार देश के लोगों से अपील करती है कि वे अगस्‍ता वेस्‍टलैंड मामले में भ्रष्‍टाचार की प्रकृति और गहराई को समझें। जांच एजेंसियां इस मामले में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते हुए जनता के प्रति अपनी जबावदेही को सुनिश्‍चित करेंगी।

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