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http://www.currentcrime.com/wp-content/uploads/2015/05/drone-1.jpgनई दिल्ली : ड्रोन के जरिए किसी कार्यक्रम की निगरानी कराना अब आसान नहीं होगा।  

जनरल आफ सिविल एविएशन (डी.जी.सी.ए.) ने दिशा-निर्देशों का मसौदा तैयार किया है  जिसमें प्रत्येक ड्रोन के लिए यू.आई.एन. नंबर भी जारी किए जाने की योजना है। 

अमरीका और सिंगापुर में इसे लेकर पहले ही नियम सख्त किए जा चुके हैं।
  पिछले साल अक्तूबर माह में दिल्ली के हाई सुरक्षा वाले क्षेत्र राजीव चौक और राष्ट्रपति भवन के आसपास एक संदिग्ध ड्रोन को उड़ते हुए देखा गया था। इसी माह में एक ड्रोन इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के आसपास भी उड़ता हुआ पाया गया था। इससे देश के खुफिया स्थानों के चित्र लिए जाने का खतरा पैदा हो गया था। डी.जी.सी.ए. ने अब जो सुरक्षा की दृष्टि से गाइड लाइन तैयार की है उसके लागू होने पर परमिट लेने के बाद ही ड्रोन का प्रयोग किया जा सकेगा, यही नहीं प्रत्येक ड्रोन को सुरक्षा की दृष्टि से एक यूनिक आइडैंटीफिकेशन नंबर (यू.एन.आई.) भी जारी किया जाएगा।

ऐसा करने वाला भारत पहला देश नहीं है, अमरीका ने भी पिछले साल मार्च माह में व्हाइट हाऊस के आसपास एक ड्रोन को उड़ता देखे जाने के बाद नियमों को कड़ा कर दिया था। यहां बता दें कि ड्रोन एक चालक रहित विमान होता है जिसे किसी विशेष क्षेत्र का नक्शा लेने, सर्वे के अलावा व्यावसायिक फोटोग्राफी के लिए प्रयोग में लाया जाता है। यही नहीं ई-कामर्स कंपनी अमेजन अपने ग्राहकों को इसके माध्यम से अमरीका में डिलीवरी करने पर भी विचार कर रही है। ऐसे में ड्रोन के खतरों को देखते हुए इंटरनैशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की अनुशंसा की थी।

मसौदे के मुताबिक प्रथम चरण में ड्रोन को देश में उड़ाने की कानूनी वैधता देने के साथ ही आप्रेशन के लिए नियमों को कड़ा किए जाने की योजना है। डी.जी.सी.ए. ने इन्हें यू.एन.आई. नंबर दिए जाने का भी प्रस्ताव रखा है।

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