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नयी दिल्ली -- केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि दिल्ली में वाहनों पर सम-विषम दिवस प्रतिबंधों को लागू करना अस्थाई शहरी विकास प्रक्रिया का परिणाम है, जिनका वर्षों से अनुकरण किया जा रहा है। सभी हितधारकों को इनसे सबक लेने की जरूरत है।

http://www.vniindia.com/photos/downloads/Venkaiah%20Naidu3.jpg वे शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्वच्छता पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में 22 राज्यों के 62 शहरों और कस्बों के मेयरों, अध्यक्षों, नगर निगम आयुक्तों और पदाधिकारियों को संबंधित कर रहे थे। 
इस दो दिवसीय कार्यशाला में शहरों को खुले में शौच जाने से मुक्त (ओडीएफ) बनाने की रणनीतियों और प्रौद्योगिकियों के बारे में विचार करने के अलावा मलीय सामग्री के सुरक्षित संशोधन और निपटान के बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा।

  नायडू ने कहा कि वर्षों से शहरों के बेतरतीब फैलाव से शहरी खाली जगह तक पहुंच में समानता की कमी, बुनियादी ढांचे की भारी जरूरत, जीवन की कमजोर गुणवत्ता और अस्थाई शहरी विकास जैसी विकृतियों को बढ़ावा मिला। इन खामियों को सरकार द्वारा शुरू की गई नई योजनाओं के तहत दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अशुद्ध वातावरण और खुले में शौच करना मूलभूत मानव अधिकारों का अतिक्रमण है। शहरी स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रमुखों को लोगों में व्यवहारिक परिवर्तन लाने और शौचालयों का प्रयोग बढ़ाने के लिए कार्य करना चाहिए। जनता तर्क संगत होती है और सही दिशा में ले जाए जाने की इच्छुक है। उन्हें गुणवत्ता युक्त सेवाओं के लिए भुगतान करने में कोई आपत्ति नहीं है।

  नायडू ने वर्ष 2016 के अंत तक 400 शहरों को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए आगे बढ़ने वाले 18 राज्यों की पहल का स्वागत करते हुए यह पूछा कि क्यों केवल राज्यों का एक समूह ही इस बारे में सबसे आगे है। उन्होंने बताया कि गुजरात के 79, मध्य प्रदेश के 68, आंध्र प्रदेश के 66, महाराष्ट्र के 60, राजस्थान के 33, छत्तीसगढ़ के 32, हरियाणा के 7, पंजाब के 5, झारखण्ड के 4, शहरों को खुले में शौच से मुक्त बनाने की स्वेच्छा प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि विकास और राष्ट्र निर्माण साझा लक्ष्य होगा और इसमें जहां तक विकास का संबंध है राजनीति को कोई जगह प्राप्त नहीं होगी।

शहरी विकास सचिव, राजीव गोबा ने कहा कि भारत से कहीं गरीब देशों में भी खुले में शौच इतने बड़े पैमाने पर नहीं देखा जाता है जितना कि भारत में है। इससे यह प्रश्न पैदा होता है कि यह समस्या पैसे से जुड़ी है या मानसिकता से। इस समस्या से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर समाधान किए जाने की जरूरत है। 

विज्ञान और पर्यावरण के लिए दिल्ली स्थित केन्द्र की निदेशक सुश्री सुनीता नारायण ने शहरी स्वच्छता परिदृश्य पर बोलते हुए कहा कि सरकार द्वारा शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन एक स्वागत योग्य पहल है और यह स्वच्छता पर समग्र पहुंच पर आधारित है। ठोस और तरल अपशिष्ट के उपचार के मुद्दे पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह इस मिशन की सकारात्मक पहुंच है। उन्होंने जल-शौचालय-अपशिष्ट-प्रदूषण गठजोड़ पर संबोधित करते हुए स्वच्छता के मुद्दे के निपटान पर जोर दिया।

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