0
नयी दिल्ली -- केंद्रीय एवं स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जेपी नड्डा ने यहां आईसीएमआर और सनफार्मा के बीच स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा में अनुसंधान और नवाचार के लिए देश की पहली सरकारी-निजी-भागीदारी (पीपीपी) की घोषणा की। आईसीएमआर की महानिदेशक डॉ. सौम्‍या स्‍वामीनाथन और सनफार्मा के प्रबंध निदेशक दिलीप सांघवी द्वारा इस समझौते पर हस्‍ताक्षर करने के समारोह की अध्‍यक्षता करते हुए  जेपी नड्डा ने कहा कि यह असाधारण पहल स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण कदम है। 

उन्‍होंने देश में स्‍वास्‍थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देने में सरकार की प्रति‍बद्धता भी दोहराई। विश्‍व मलेरिया दिवस समारोह के अवसर पर केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि यह सहयोग देश में मलेरिया उन्‍मूलन के लिए सरकार की कार्य नीति में एक महत्‍वपूर्ण मील का पत्‍थर साबित होगा। श्री नड्डा ने बताया कि 2030 तक मलेरिया उन्‍मूलन के लिए पूर्वी एशिया शिखर सम्‍मेलन की प्रतिबद्धता में भारत एक पक्ष है, इसलिए मलेरिया उन्‍मूलन प्रदर्शन परियोजना की आज की घोषणा का विशेष महत्‍व है।

मलेरिया लोगों की प्रमुख स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है और मलेरिया ग्रसित देशों में आर्थिक वृद्धि की दर कम दर्शाई गई है इसको ध्‍यान में रखते हुए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने बताया कि आईसीएमआर और सनफार्मा की भागीदारी के हिस्‍से के रूप में मलेरिया उन्‍मूलन में राष्‍ट्रीय ढांचे की सहायता के लिए मलेरिया उन्‍मूलन प्रदर्शन परियोजना-'मलेरिया मुक्‍त भारत' का गठन किया जाएगा, जिसकी घोषणा स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा फरवरी 2016 में की गई थी। प्रदर्शन परियोजना की शुरूआत पहले मांडला से की जाएगी, जो मध्‍यप्रदेश के सबसे अधिक मलेरिया प्रभावित जिलों में से एक है। सनफार्मा मांडला जिले के 200,000 घरों के लिए 3 से 5 वर्ष की अवधि तक मलेरिया उन्‍मूलन कार्यक्रम चलाने के लिए राशि उपलब्‍ध करायेगी। मध्‍य प्रदेश की सरकार की मदद और इस सहयोग से मांडला जिले में मलेरिया उन्‍मूलन प्रदर्शन परियोजना कार्यान्‍वित की जाएगी।

इसके अलावा पीपीपी के हिस्‍से के रूप में आईसीएमआर और सनफार्मा स्‍वास्‍थ्‍य उत्‍पाद विकसित करने (औषधि और टीके शामिल) और उनके परिक्षणों के लिए संयुक्‍त रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान भी करेंगे। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने कहा कि वे ओडिशा के मलेरिया प्रभावित जिले से हैं। उन्‍होंने कहा कि देश के कई जनजातीय इलाकों में मलेरिया के मरीज अधिक संख्‍या में होते हैं, जिससे समुदायों की उत्‍पादकता पर बुरा असर पड़ता है। श्री जुएल ओराम ने आईसीएमआर की इस विशेष पीपीपी पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह देश में इस बीमारी का मुकाबला करने में एक महत्‍वपूर्ण कदम है।

मध्‍य प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री  नरोत्‍तम मिश्रा ने बताया कि 13 मलेरिया प्रभावित जिलों में से सबसे बुरी स्थिति मांडला की है। उन्‍होंने कहा कि पीपीपी परियोजना को स्‍वास्‍थ्‍य अभियान के साथ जोड़ा गया है और इससे वातावरण स्‍वस्‍थ रखने के बारे में जागरूकता भी पैदा होगी।

पीपीपी की विशेषताओं के बारे में बताते हुए आईसीएमआर की निदेशक डॉ.सौम्‍या स्‍वामीनाथन ने बताया कि देश में स्‍वास्‍थ्‍य रूपांतरण की तुरंत आवश्‍यकता है और बीमारियों को दूर करने के लिए औषधि तथा इलाज की रणनीतियों के वास्‍ते देश को ऐसी साझेदारी करनी चाहिए। मलेरिया उन्‍मूलन विकास परियोजना इस दिशा में एक सही कदम है।

सनफार्मा के प्रबंध निदेशक दिलीप सांघवी ने बताया कि पीपीपी का फोकस मलेरिया उन्‍मूलन में वैश्विक ज्ञान का उपयोग करना है। उन्‍होंने कहा कि सबसे अधिक मलेरिया प्रभावित मांडला से इस कार्यक्रम शुरूआत करने के बाद वहां के अनुभवों से सीख लेकर इसका उपयोग बड़े भौगोलिक क्षेत्र के लिए रणनीति तैयार करने में किया जाएगा।

Post a Comment Blogger Disqus

 
Top