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http://newimg.amarujala.com/2014/12/20/acr468-5494a359a85aacourt.JPGनई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सिगरेट के डिब्बों को अनाकर्षक और बेरंग बनाने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सवाल किया कि आप कैसे साबित करेंगे कि सिगरेट पीने से कैंसर होता है ? 

भारत के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और यू ललित की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि बहुत से लोग स्मोकिंग नहीं करते, लेकिन उन्हें भी कैंसर हो जाता है। कई लोग ऐसे हैं जो सिगरेट लगातार पीते हैं, लेकिन पूरी जिंदगी स्वस्थ रहते हैं।   
खंडपीठ ने इस याचिका पर केंद्र का जवाब मांगा है। यह याचिका इलाहाबाद के वकील उमेश नारायण शर्मा ने दायर की है। गुटखा खाने और सिगरेट पीने के आदी उमेश को जीभ का और मुंह का कैंसर है और मुंबई के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उमेश का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक, साल 2020 तक सिगरेट पीने और तंबाकू के सेवन से पूरी दुनिया में लगभग 15 लाख लोगों की मौत हो जाएगी। 
याचिकाकर्ता ने कहा कि तंबाकू के उत्पाद काफी अट्रैकटिव पैकेटों में आते हैं, जिन्हें देख कर युवा उनका सेवन करने के लिए आकर्षित हो जाते हैं और पैकिंग पर लिखी चेतावनी को भी नजरंदाज कर देते हैं। इसलिए पैकैटों पर चेतावनी को बड़े अक्षरों में लिखने और पैकिंग को बेरंग बनाने से लोग ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करने से बच सकते है।

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