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नई दिल्ली --  सरकार ने गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों पर अप्रत्यक्ष रूप से टैक्स लगाने का तरीका खोज निकाला है। इससे विदेश में होने वाले डिजिटल ट्रांजैक्शंस पर टैक्स लगाया जा सकेगा और ऐडवर्टाइजर्स के लिए कॉस्ट बढ़ जाएगी। 

http://browsetechnology.com/wp-content/uploads/2013/10/Google-Facebook.jpgडिजिटल ऐडवर्टाइजिंग प्लैटफॉर्म्स पर सीधा टैक्स लगाने की बजाय सरकार ने ऐडवर्टाइजर्स की ओर से चुकाई जाने वाली फीस पर 6 फीसदी की 'इक्वलाइजेशन लेवी' लगाने की योजना बनाई है। 

'इक्वलाइजेशन' इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सरकार प्रतिस्पर्धा के लिए बराबरी का माहौल तैयार कर रही है और गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों को उस रकम पर टैक्स चुकाना होगा, जो वे लोकल ऐडवर्टाइजर्स से हासिल करती हैं। 

सरकार ने इसके पीछे कारण यह दिया है कि मल्टीनैशनल डिजिटल प्लैटफॉर्म्स के पास भारत में 'स्थायी ठिकाना' नहीं है, जिससे उन पर टैक्स देनदारी नहीं बन पाती है। उन पर दोहरा टैक्स भी नहीं लगाया जा सकता था। ऐसे में सरकार को इन प्लैटफॉर्म्स के प्रॉफिट में से कुछ हिस्सा हासिल करने का तरीका खोजना है। 

फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेतली ने अपने बजट भाषण में कहा था कि स्थायी ठिकाना न रखने वाली 'विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों' को ऑनलाइन ऐडवर्टाइजिंग के लिए एक वर्ष में एक लाख रुपये से अधिक की पेमेंट पर 6 फीसदी का टैक्स लगेगा। इसका बोझ पूरी तरह गूगल, ऐडवर्टाइजर या दोनों को उठाना पड़ेगा।

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