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नयी दिल्ली -- कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय  वित्त मंत्री  अरूण जेटली को भेजे अपने बजट पूर्व ज्ञापन में मांग की है कि रिटेल व्यापार के विकास और संचालन के लिए एक रिटेल डेवलपमंेट एंड रेगुलेटरी ऑथोरिटी की स्थापना की जाए वहीं दूसरी ओर अर्थव्यवस्था के अन्य वर्गाें की तरह रिटेल ट्रेड के लिए एक राष्ट्रीय व्यापार नीति बनायीं जाए और केन्द्र एवं राज्य स्तर पर पृथक रूप से एक आंतरिक व्यापार मंत्रालय का गठन किया जाए। 
कैट ने यह भी मांग की है की रिटेल व्यापार और ई कॉमर्स में किसी भी प्रकार से एफडीआई को अनुमति न देने की स्पष्ट घोषणा की जाए वहीं ई कॉमर्स और डायरेक्ट सेलिंग व्यापार के लिए नियम एवं कायदे  कानून बनाए जाए।

कैट ने अपने ज्ञापन में कहा है कि देश में नकदरहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड एवं नेट बैंकिंग की
अधिकतम उपयोग हेतू बजट में एक प्रोत्साहन स्कीम की घोषणा की जाए। मुद्रा बैंक का धनाभाव से ग्रसित लोगों तक पहुंचाने के लिए मुद्रा को संसद में एक कानून लाकर एक रेगूलेटर बनाया जाए और मुद्रा योजना मंे देशभर में व्यापारी संगठनों को जोड़ा जाए जिससे वास्तविक लोगों को मुद्रा ऋण आसानी से मिल सके।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्राी  प्रवीन खंडेलवाल ने आज बताया कि कैट ने अपने बजट पूर्व ज्ञापन में जीएसटी कर प्रणाली को देशभर में एक कर- एक ऑथारिटी सभी राज्यों में समान कानून, समान कर हटें और अंर्तराज्यीय व्यापार में लागू सभी प्रकार के रोड परमिट और एंट्री फार्म समाप्त करते हुए लागू किया जाए। कैट ने यह भी कहा है कि व्यापारियों को प्राइमरी सेक्टर लैंडिंग रेट पर बैंकों से वित्तीय सहायता देने की योजना भी बनाई जाए। कैट ने यह भी कहा है कि शैक्षिक एवं स्वास्थ्य के क्षेत्रों में काम कर रहे व्यापारियों को स्पेशल पैकेज भी दिया जाए जिससे बेहद उचित दामों पर आम आदमी को शिक्षा और चिकित्सा उपलब्ध हो सके।

खंडेलवाल ने यह भी मांग की है कि व्यापार पर लगे सभी प्रकार के कर एवं अन्य कानूनों की पुर्नसमीक्षा के लिए एक पुर्नसमीक्षा आयोग गठित किया जाए तथा जो कानून वर्तमान में अप्रासंगिक हो गये हैं उनको समाप्त किया जाय और जिन कानूनों में संसोधनों की आवश्यकता है उनमें
संसोधन किये जायें। कैट ने यह भी मांग की है कि रिटेल सेक्टर को अत्याध्ुनिक बनाने और उच्चस्तरीय बनाने के लिए रिटेल व्यापार की जमीनी हकीकत और परेशानियों को समझना जरूरी है जिसके लिए अधिकारियों एवं व्यापारियों की एक संयुक्त समिति गठित की जाए।

अपने बजट पूर्व ज्ञापन में कैट ने कहा है कि फ्री ट्रेड जोन और स्पेशल इकोनोमिक जोन की तर्ज पर सरकार को रूरल इकोनोमिक जोन गठित करनी चाहिए जिससे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापार का अधिक विकास हो सके और ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले व्यापारियों को पांच वर्ष तक सभी करों में छूट मिलनी चाहिए। कैट ने यह भी मांग की है कि 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यापारियों को पेंशन दी जानी चाहिए। जो उनके द्वारा एकत्र किये गये कर का एक हिस्सा हो सकती है।

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