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नई दिल्लीः  ‘उर्दू पत्रकारिता के 200 साल अतीत वर्तमान और संभावनाएं’ के विषय पर आयोजित राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के विश्व सम्मेलन मे अधिकतर वक्ताओं ने उर्दू भाषा और साहित्य के विकास मे उर्दू पत्रकारिता के किरदार पर चर्चा की और अतीत की उर्दू पत्रकारिता की अहमियत, सारगिर्भिता और जागरूकता मे इसके रोल पर प्रकाश डाला। कुछ वक्ताओं ने उर्दू पत्रकारिता के गिरते हुए स्तर पर भी चिंता व्यक्त की । 

दिल्ली विश्वविद्यालय के कांनफ्रेंस सेंटर मे आयोजित तीन दिवसीय विश्व उर्दू सम्मेलन के अंतिम दिन के पहले सत्र का आंरभ अब्दुल सलाम आसिम के आलेख से हुआ जिन्होंने उर्दू पत्रकारिता का जायजा लेते हुए उर्दू पत्रकारिता की खूबियों और कमियों पर अपनी बात कहीं। 

मौरिशस की महरीन कादरा हुसैन ने ‘उर्दू पत्रिकाएं और महिलाओं का योगदान’ विषय पर अपना आलेख प्रस्तुत किया। मुख्तार अहमद फरदीन ने ‘पत्रकारिता का सामूहिक जायजा’ प्रस्तुत किया और वर्तमान पत्रकारिता की अहमियत और उसके गिरते हुए स्तर पर भी प्रकाश डाला। 

उजबेकिस्तान के डा. सिराजुदीन नूर मातो ने ‘उजबेकिस्तान मे उर्दू’ विषय पर अपना आलेख प्रस्तुत किया। कतर के अहमद अशफाक ने ‘ उर्दू पत्रकारिता के वर्तमान परिदृश्य’ को अपने आलेख का विषय बनाया। डेनमार्क के नसरुल्ला मलिक ने अपने आलेख मे उपमहाद्वीप की पत्रकारिता पर प्रकाश डाला। पकिस्तान के ही डा. मौहम्मद कामरान ने उर्दू पत्रकारिता के अतीत पर अपना आलेख प्रस्तुत किया। प्रो0 सज्जाद हुसैन ने ‘तमिलनाडु मे उर्दू पत्रकारिता’ विषय पर आलेख पड़ा और वहां से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों पर मजबूती से अपनी बात कही। 

उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु से निकलने वाले समाचार पत्र केवल कर्नाटक, तमिलनाडु ही नही बल्कि यू.पी. के जिलों मे भी पंसद किये जाते थे। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्रो0 शाहिद हुसैन ने शोधपरक आलेख प्रस्तुत किया जिसमें उर्दू पत्रकारों को दी गयी यात्नाओं का वर्णन था। 

इस सत्र की अध्यक्षता जावेद दानिश, प्रो0 शबनम हमीद, करीम रजा मुंगेरी, पद्म श्री मुजफ्फर हुसैन और प्रो0 जमाआरजूदा ने संयुक्त रूप से की जबकि संचालन का कार्य शुएब रजा फातमी ने किया इस अवसर पर अध्यक्ष गणों ने भी विचार विमर्श किया। प्रो0 जमाआरजूदा अपनी अध्यक्षीय वक्तव्य मे कहा की हमे अब भविष्य के लिए कार्य योजना बनाने की जरूरत है।
 उन्होंने इस बात पर सहमति जताई की समचार पत्रों ने भाषा और साहित्य की बड़ी सेवा की है और आम लोगों तक उर्दू को पहुचाने का फर्ज अंजाम दिया है। साहित्य की पत्ररिकाओं पहुंच विशेष क्षेत्र तक सीमित है जबकि समाचार पत्र हर आम और खास पहुंचता है। 

सम्मेलन के तीसरे तीन के दूसरे और अंतिम सत्र मे डा. रशीद अहमद (बंग्लादेश), मोहतरमा ताशियाना शमतालि (मॉशिस) प्रो0 ताश (उजबेस्तिान), डा. रफीउदीन नासिर, डा. अबरार रहमानी, डा. जीमल अख्तर, प्रो0 मुश्तफा हुसैन और प्रो0 तेहशीन फिराकी ने अपने आलेख प्रस्तुत किए।

इस सत्र की अध्यक्षता जनाब जुबेर रिजवी, डा. अतहर फारूकी, डा. ऐलन और पद्म श्री मुजफ्फर हुसैन ने की जबकि संचालन कार्य डा. मुश्ताक आलम कादरी ने किया। विश्व उर्दू सम्मेलन के अंतिम दिन शाम मे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत ‘मैं उर्दू हूं’ नाटक का मंचन किया गया ।

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