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नयी दिल्ली -- मैसूर विश्‍वविद्यालय में आयोजित भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 103वें संबोधित सत्र में ‘’एग्री-बॉयो इंफोरमेटिक्‍स में बिग डाटा और क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग’’ पर आयोजित एक गोष्‍ठी को संबोधित करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान के वरिष्‍ठ वैज्ञानिक डॉ.एके मिश्रा ने कहा कि हर दिन 2.5 क्‍यूंटिलियन बाइटस के सृजित होने के कारण आंकड़ों का संग्रहण और इनका विश्‍लेषण एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस संबंध में बड़े आंकड़ों के लिए क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग एक समाधान पेश कर सकता है।

बड़े आंकड़ों के विश्‍लेषण में क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग के अनुप्रयोग साझा करने और कम लागत का होने के कारण यह बड़ा महत्‍वपूर्ण है। यह प्रौद्योगिकी वर्तमान में जीनोमिक आंकड़ों के संग्रहण और विश्‍लेषण में मदद दे सकती है। दीर्घकालिक आजीविका और विकास के लिए कृषि जिसमें पेड़ पौधे और पशु शामिल हैं के संबंध में बहुत महत्‍वपूर्ण साबित हो सकती है। उन्‍होंने कहा कि विश्‍व में 90 प्रतिशत आंकड़े पिछले दो वर्षों में सृजित हुए हैं।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि देशभर में फैले हजारों कृषि संगठनों को एक दूसरे से जोड़ा जाना चाहिए और क्‍लाउड इसके लिए एक अच्‍छा विकल्‍प साबित हो सकता है। इसके साथ ही प्रयेाग कर्ताओं के अनुरूप फसल अभिकलनात्‍मक जटिलता कलंनगणित और उपकरणों के विकास की आवश्‍यकता भी है। 

क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग में लो बैंडविड्थ के कारण बड़े आंकड़ों के आदान-प्रदान की आवश्‍यकता के चलते क्‍लाउड सॉफ्टवेयर के प्रयोग कर्ताओं और क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग के डेवपर्स के सामने समस्‍या आती है। इससे निजता और सुरक्षा से जुड़े नये मुद्दे सामने आते है। हालांकि यह बड़े आंकड़ों के विश्‍लेषण के लिए प्रभावी सिद्ध हुआ है और वर्तमान में इसका प्रयोग संयुक्‍त राज्‍य संघीय सरकार, औषधीय एवं इंटरनेट कंपनियों, वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और बॉयो इंफोरमेटिक्‍स सेवाओं द्वारा किया जा रहा है।

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