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झारखंड --- राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हजारीबाग में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में  बोलते हुए  कहा कि विनोबा भावे विश्वविद्यालय में अब 24 स्नातकोत्तर विभाग, 22 घटक कॉलेज और 91 संबद्ध कॉलेज हैं, जो मानविकी, विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, कंप्यूटर एप्लीकेशन, इंजीनियरिंग, कानून, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षण तथा अनुसंधान कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।

 इसके क्षेत्राधिकार में पूरे झारखंड राज्य के आयुर्वेद और होम्योपैथी कॉलेज हैं। ढाई दशक पूरे करने के बाद विनोबा भावे विश्वविद्यालय अब इक्कीसवीं सदी की एक आधुनिक संस्था और उत्कृष्टता का केंद्र बनने के अपने सपने को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों को एकाकी होकर काम नहीं करना चाहिए। उन्हें समाज की भलाई के लिए योगदान देना चाहिए। सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरूआत की है। इन पहलों में भारत के भाग्य को बदलने की क्षमता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अतीत में भारत शिक्षा और अनुसंधान के लिए जाना जाता था। एक समय था, जब भारत ने उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में दुनिया में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। यहां तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी, सोमपुरा और ओदांतापुरी जैसे शिक्षा के प्रसिद्ध केंद्र थे, जिन्होंने लगभग 1800 वर्षों तक भारत को दुनिया से आगे रखा। सदियों से यहां दुनिया भर के ज्ञान का सम्मिलन होता रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले साढ़े तीन साल के दौरान उन्होंने 100 से अधिक संस्थानों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार की जरूरत पर जोर दिया है। हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर से योग्यता में कोई कमी नहीं थी। हालांकि उन्हें खुद को बेहतर ढंग से बढ़ावा देने जरूरत है। हरगोबिंद खुराना और वी रामकृष्ण जैसे नोबल पुरस्कार विजेताओं ने भारतीय विश्वविद्यालयों में ही अपनी शिक्षा पूरी की। उन्होंने कहा कि लगातार जोर दिए जाने और संबंधित संस्थाओं के प्रयासों से पहली बार दो भारतीय संस्थान दुनिया के शीर्ष 200 संस्थानों में शामिल हुए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि जल्द ही और बहुत से संस्थान इन संस्थानों की श्रेणी में आ जाएंगे।

इस मौके पर राष्ट्रपति ने पूर्व वित्त और विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा की भी प्रशंसा की, जिन्हें डी लिट की मानद उपाधि से नवाजा गया।

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