0
भारत सरकार, राजस्थान और राजस्थान के डिस्कॉम्स (जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड) ने डिस्कॉम्स के परिचालन और वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए आज ‘’उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना’’- उदय स्कीम के अंतर्गत समझौते ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर केन्द्रीय विद्युत, कोयला और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल जी की उपस्थिति में किये गये।
उदय के अंतर्गत समझौते ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर करने वाला राजस्थान तीसरा राज्य है, अन्य दो राज्य झारखंड और छत्तीसगढ़ हैं।  
उदय योजना का शुभारंभ भारत सरकार द्वारा 20 नवम्बर, 2015 को ऋण में डूबी वितरण इकाईयों के लिए वित्तीय स्थिरता और विकास हेतु एक स्थायी और दीर्घकालिक समाधान को सुनिश्चित करने के लिए किया गया था। देशभर की वितरण कंपनियों पर लंबे समय से लगभग 4.3 लाख करोड़ रूपए का ऋण बकाया है। उदय के माध्यम से इन डिस्कॉम की वित्तीय और परिचालनगत हालत को सुधारते हुए सस्ती दरों पर पर्याप्त विद्युत की आपूर्ति और सभी के लिए 24 घंटे बिजली एवं 100 प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण की दिशा में सरकार के प्रयासों को सक्षम बनाने का एक प्रयास है। 
उदय के अंतर्गत समझौते ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर होने से, राजस्थान की डिस्कॉम्स वित्तीय सुधार की दिशा में प्रथम कदम उठा चुकी हैं। 30.09.2015 को डिस्कॉम्स का बकाया ऋण 80500 करोड़ रूपए था, जिसमें से 75 प्रतिशत अर्थात 60500 करोड़ रूपए का वहन योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। यह योजना 20000 करोड़ रूपए के शेष ऋण के लिए औसत वर्तमान ब्याज दर से भी कम करीब 3 प्रतिशत के कूपन मूल्यों का पुनर्मूल्य तय किए जाने अथवा राज्य द्वारा गारंटीकृत बांड्स की सुविधा भी प्रदान करती है। राजस्थान डिस्काम्स के ऋण में कमी आने और शेष ऋण पर ब्याज दरों में कमी होने से वार्षिक ब्याज लागत में करीब 3000 करोड़ रूपए की बचत होगी।
उदय में डिस्कॉम्स की परिचालन कुशलताओं में सुधार लाने पर जोर दिया गया है। राजस्थान और डिस्कॉम्स, अनिवार्य फीडर और वितरण ट्रांसफॉर्मर मीटरिंग, उपभोक्ता अनुक्रमण एवं घाटों की जीआईएस मैपिंग, ट्रांसफॉर्मरों के उन्नयन/बदलाव, मीटर, उपभोक्ताओं की स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से परिचालनगत कुशलता लाने के प्रति वचनबद्ध है ताकि इनके माध्यम से पारेषण और एटीएंडसी हानियों में कमी लाई जा सके। वित्तीय वर्ष 2018 तक विद्युत की आपूर्ति लागत और वास्तविकता के बीच के अंतर को भी दूर किया जाएगा। एटीएंडसी और पारेषण हानियों में क्रमश: 15 प्रतिशत और 3.5 प्रतिशत की कमी से वित्तीय वर्ष 2019 तक डिस्कॉम्स को करीब 7300 करोड़ रूपए का अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है।
उदय में मांग से जुड़े पक्ष जैसे ऊर्जा-कुशल एलईडी बल्बों, कृषि पम्पों, पंखों और एयर-कंडीनरों एवं पीएटी (प्रदर्शन, प्राप्ति, व्यापार) के माध्यम से कुशल औद्योगिक उपकरणों के उपयोग से अत्यधिक मांग को घटाने, भार को बांटने और इस प्रकार से राजस्थान में ऊर्जा खपत को कम करने में मदद मिलेगी। इससे होने वाले लाभ की संभावना वित्तीय वर्ष 2019 तक करीब 2000 करोड़ रूपए है।
केन्द्र सरकार राज्य में विद्युत बुनियादी ढांचे में सुधार और विद्युत की लागत में कमी लाने के लिए डिस्कॉम्स और राज्य सरकार को प्रोत्साहन भी प्रदान करेगी। राजस्थान को डीडीयूजीजेवाई, आईपीडीएस, विद्युत क्षेत्र विकास कोष जैसी केन्द्रीय योजनाओं अथवा एमओपी और एमएनआरई जैसी अन्य योजनाओं के माध्यम से अतिरिक्त/प्राथमिक वित्तपोषण प्रदान किया जाएगा यदि वे इस योजना में उल्लेखित परिचालनगत उपलब्धियों को हासिल करने में सफल रहती है। राज्य को अधिसूचित दरों पर अतिरिक्त कोयले और उच्च क्षमता उपयोग के माध्यम से उपलब्धता के मामले में एनटीपीसी और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों की इकाईयों से न्यून लागत पर विद्युत की सहायता भी प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, कोल स्वैपिंग, कोल ग्रेड स्लिपेज में सुधार, 100 प्रतिशत धुले हुए कोयले की उपलब्धता जैसे अन्य लाभों से राज्य को विद्युत के मूल्यों को आगे और कम करने में सहायता मिलेगी। राज्य को इन कोयला सुधारों से करीब 3000 करोड़ रूपए का लाभ होगा। वित्तीय और परिचालनगत कुशलताओं में सुधार के माध्यम से, डिस्कॉम्स की रेंटिग में सुधार होगा, जिससे उन्हें अपनी भविष्य की पूंजी निवेश आवश्यकताओं के लिए सस्ती दरों पर कोष प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इससे 3 वर्षो में डिस्कॉम्स को करीब 150 करोड़ रूपए की ब्याज लागत बचत होने की संभावना है। 
राजस्थान को ब्याज लागत में बचत, एटीएंडसी और पारेषण हानियों में कमी, ऊर्जा कुशलता में सुधार और कोयला सुधारों आदि के द्वारा उदय के माध्यम से करीब 21000 करोड़ रूपए का शुद्ध लाभ प्राप्त होगा।
समझौता ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर का प्रमुख लाभ राजस्थान के लोगों को मिलेगा। डिस्कॉम्स से बिजली की उच्च मांग से अभिप्राय उत्पादन इकाईयों का उच्च पीएलएफ और इस प्रकार से, विद्युत की प्रति इकाई की कम लागत से उपभोक्ता लाभांवित होंगे। एटीएंडसी हानियों के कम होने से डिस्कॉम्स क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति को बढ़ाएंगी। इस योजना से राजस्थान के उन करीब 396 ग्रामों और 30 लाख परिवारों को शीघ्रता के साथ बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी जहां आज भी बिजली नहीं हैं। संपर्क रहित गांवों और परिवारों आदि को 24 घंटे बिजली की उपलब्धता से आर्थिक गतिविधि में वृद्धि होगी और रोजगार अवसरों में सुधार होगा। इस समझौते ज्ञापन के माध्यम से राजस्थान को भारत के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में से एक के तौर पर विकसित किया जा सकेगा।  
उदय के अंतर्गत इस समझौते ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर से समूचे विद्युत क्षेत्र में सुधारों की प्रक्रिया में तेजी आएगी और सस्ती दरों पर सभी के लिए 24 घंटे बिजली को सुनिश्चित किया जा सकेगा। सही मायनों में, इस योजना से एक ‘’शक्तिशाली भारत’’ के उदय का सूत्रपात भी होगा।

Post a Comment Blogger Disqus

 
Top