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पेरिस : इस वर्ष फ्रांस में साप्ताहिक पत्रिका शार्ली हेब्दो पर हमले से इराक तथा सीरिया के बाद पत्रकारों के लिए यह तीसरा सबसे खतरनाक देश की सूची में शामिल हो गया । पेरिस स्थित मीडिया फ्रीडम ऑर्गेनाइजेशन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि इस वर्ष वैश्विक स्तर पर 67 पत्रकार मारे गए हैं । 

इनमें से ज्यादातर को उनके काम की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया या रिपोर्टिंग के दौरान उनकी मौत हो गई । इसके अलावा 27 नागरिक (शौकिया) पत्रकारों तथा सात मीडियाकर्मी भी मारे गए हैं ।
आरएसएफ के सेक्रेटरी जनरल क्रिस्टोफ डीलोइर ने कहा कि ज्यादातर पत्रकारों की मौत इसलिए नहीं हुई है कि वह बमबारी के समय गलत स्थान पर रहे बल्कि कामों से रोकने के लिए उनकी हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में अगर आप पत्रकार हैं और आप दुनिया के दूसरे पक्षों का उजागर कर रहे हैं तो कट्टरपंथी समूह के लोग आपको काली सूची में डाल देंगे तथा दूसरे अन्य लोग आपकी हत्या कर देंगे । पेरिस में इस वर्ष सात जनवरी को शार्ली हेब्दो के दफ्तर पर कट्टरपंथी बंदूकधारियों ने हमला कर दिया जिसमें आठ पत्रकारों की मौत हो गई ।

पश्चिमी देशों में पत्रकारों पर इस तरह का पहला हमला था । इस वर्ष इराक में 11 तथा सीरिया में दस पत्रकार मारे गए हैं । इसके अलावा यमन चौथा ऐसा देश है जहां सबसे अधिक पत्रकार मारे गए हैं। इसके बाद सूडान, भारत, मेक्सिको, फिलीपीन्स तथा होन्डुरस में पत्रकारों के लिए खतरा अधिक है।

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