0
नई दिल्ली - द्वारका की संस्थाओं 'पहल', 'हयूमन हेल्प' और 'एजवेल होलिस्टिक केयर' की ओर से मानवाधिकार से संबंधित जानकारियों के संबंध में चर्चा-गोष्ठी का आयोजन द्वारका कोर्ट्स के कांफ्रेंस हॉल में किया गया. 
इस अवसर पर अनिल कुमार पाराशर ने मानवाधिकार के संबंध में श्रोताओं को महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दीं. 

       उन्होंने मानवाधिकार की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट की. इस आंदोलन की पृष्ठभूमि को विस्तार से बताया. उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए कहा. 

 उन्होंने बताया कि भारत में मानवाधिकार आयोग की स्थापना 1993 में हुई थी.तबसे समाज में जाग्रति आई है और उच्चतम न्यायलय तथा अन्य संस्थाओं ने इसका महत्त्व समझा है और समर्थन किया है. उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए कहा. यदि कहीं कोई अमानवीय कार्य हों तो उसकी शिकायत आयोग को देनी चाहिए.

चर्चा गोष्ठी का संचालन आभा गोरेन ने किया. इंदर मोहन खन्ना ने तीनों संस्थाओं की गतिविधियों की जानकारी दी. इस अवसर पर सी.बी.आई. के पूर्व निर्देशक देबाशीष बागची (आई.पी.एस.), साहित्यकार अशोक लव और द्वारका सिटी की संपादिका और समाजसेवी सुधा सिन्हा विशिष्ट-अतिथि थे. 

अनिल कुमार पाराशर मानवाधिकार आयोग के संयुक्त सचिव हैं. उन्होंने श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए. इस अवसर पर द्वारका की अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी और पत्रकार उपस्थित थे. प्रेम कुमार चोपड़ा,आर.के.सूरी,ज्योति शर्मा,रुमना लाला, मनोज अग्रवाल, पी.के.अग्रवाल आदि ने इसमें सक्रिय भाग लिया और अनेक प्रश्न पूछे.द्वारका में इस तरह की यह पहली गोष्ठी थी. 

Post a Comment Blogger Disqus

 
Top