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नई दिल्ली : दुनिया का सबसे धनी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का ढांचा अगले वर्ष पूरी तरह बदल सकता है। बीसीसीआई की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए लोढ़ा समिति का गठन किया गया था जिसके अध्यक्ष जस्टिस लोढा अगले वर्ष चार जनवरी को उच्चतम न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश कर सकते हैं। जस्टिस लोढा ने बीसीसीआई में बड़े बदलावों के सुझाव दिए हैं। 
 
 जस्टिस लोढा के प्रस्तावों को यदि स्वीकार कर लिया जाता है तो बीसीसीआई के ढांचे, उसके प्रबंधन और काम करने के तौर-तरीके पूरी तरह से बदल जाएंगे। सुझावों के अनुसार बीसीसीआई प्रबंधन को क्रिकेटरों के हाथों में सौंपना नेताओं और कारोबारियों को प्रबंधन से दूर रखना, हर राज्य से एक रणजी टीम का होना , बोर्ड को सोसायटी से एक पब्लिक ट्रस्ट के रूप में बदलना और बीसीसीआई के राजस्व बांटेन के मॉडल में परिवर्तन लाना शामिल है। 
 
जस्टिस लोढा ने अपनी रिपोर्ट में बीसीसीआई के हर तरीके के कामकाज का गहन विश्लेषण किया है। लोढा समिति को अगर स्वीकार कर लिया जाए तो इससे न केवल क्रिकेट सर्कल, बल्कि बोर्ड मेें उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों में भी हलचल मच जाएगी। इसके अलावा बोर्ड का प्रबंधन पूर्व क्रिकेटरों के हाथों में चला जाएगा।   
 
वर्तमान में बीसीसीआई तमिलनाडु सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1975 के तहत रजिस्टर्ड है और अगर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया जाता है तो यह व्यवस्था भी बदल सकती है। समिति ने सुझाव दिया है कि बोर्ड को सोसायटी के बजाए पब्लिक ट्रस्ट या कंपनी बना दिया जाए, ताकि कामकाज में पारदर्शिता बनी रहे। रिपोर्ट में बोर्ड के राजस्व बांटने के मॉडल में भी बदलाव करने की सिफारिश की गई है। इससे पैसों के लेन-देन का मामला पूरी तरह से पारदर्शी होगा। इसके अलावा बोर्ड पर नेताओं का प्रभाव भी कम होगा।  

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